SPORTS DESK : भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने के बाद अपने संघर्ष भरे सफर को याद किया। उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने खेल छोड़ने का विचार कर लिया था, लेकिन कठिन परिस्थितियों से लड़ते हुए उन्होंने वापसी की और अब देश के लिए पदक जीतकर इतिहास रच दिया। तेजस्विन ने बताया कि चोटों, निराशाजनक प्रदर्शन और लगातार चुनौतियों ने उनके आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित किया था। कई बार उन्हें लगा कि अब आगे बढ़ना मुश्किल है, लेकिन परिवार, कोच और सपोर्ट स्टाफ ने उनका हौसला बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि इस कांस्य पदक का महत्व उनके लिए किसी स्वर्ण से कम नहीं है, क्योंकि इसके पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और मानसिक मजबूती छिपी हुई है। उनके अनुसार, कठिन दौर ने उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत खिलाड़ी बनाया। कॉमनवेल्थ गेम्स में तेजस्विन ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर जगह बनाई। उनकी उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है और इससे देश को एक और ऐतिहासिक पदक मिला है।
तेजस्विन ने अपने बयान में युवा खिलाड़ियों को भी संदेश दिया कि असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका मानना है कि धैर्य और लगातार मेहनत ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। भारतीय खेल प्रेमियों ने तेजस्विन शंकर की इस उपलब्धि का जोरदार स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर उनके संघर्ष और वापसी की कहानी की खूब सराहना हो रही है। अब उनसे आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी इसी तरह के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।


