SPORTS DESK : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर अब और सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। इंग्लैंड दौरे के बाद टीम की फिटनेस पर उठे सवालों के बीच बोर्ड ने ब्रोंको टेस्ट और 2 किलोमीटर रन टेस्ट को मानकीकृत (स्टैंडर्डाइज) करने का फैसला किया है, ताकि सभी खिलाड़ियों का एक समान पैमाने पर मूल्यांकन किया जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, BCCI का उद्देश्य घरेलू क्रिकेट से लेकर राष्ट्रीय टीम तक सभी खिलाड़ियों के लिए एक जैसी फिटनेस प्रक्रिया लागू करना है। इसके तहत खिलाड़ियों को तय मानकों के अनुसार अपनी फिटनेस साबित करनी होगी, तभी उन्हें चयन के लिए योग्य माना जाएगा।
ब्रोंको टेस्ट खिलाड़ियों की गति, सहनशक्ति और रिकवरी क्षमता को मापता है, जबकि 2 किलोमीटर रन टेस्ट उनकी स्टैमिना और कार्डियो फिटनेस का आकलन करता है। बोर्ड का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में लगातार मैचों और व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए खिलाड़ियों का पूरी तरह फिट होना बेहद जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, इंग्लैंड दौरे के दौरान खिलाड़ियों की फिटनेस और कार्यभार (वर्कलोड) को लेकर हुई समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। BCCI चाहता है कि भविष्य में चोटों की संख्या कम हो और खिलाड़ी लंबे समय तक लगातार प्रदर्शन कर सकें।
नई फिटनेस नीति लागू होने के बाद राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) और राज्य क्रिकेट संघों में भी एक समान फिटनेस मानक अपनाए जाने की संभावना है। इससे खिलाड़ियों की निगरानी और चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस पर यह सख्ती भारतीय टीम के लिए लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे खिलाड़ियों की शारीरिक तैयारी बेहतर होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम का प्रदर्शन भी अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।


