चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मिलने वाले मिड-डे मील (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अब स्कूलों के मुख्याध्यापकों (Headmasters) को निर्देश दिए गए हैं कि वे हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन से मिलने वाले राशन की डिलीवरी स्वीकार करने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करें। सामान की क्वालिटी मानक के अनुसार होने पर ही उसे स्वीकार किया जाएगा।
क्यों पड़ी सख्त निर्देशों की जरूरत?
हाल ही में राज्य के कई स्कूलों से मिड-डे मील की सामग्री की घटिया गुणवत्ता को लेकर शिकायतें आई थीं:
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हिसार का मामला: हिसार के एक स्कूल में कई घंटों तक भिगोने के बाद भी राजमा नहीं गले।
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बासी और खराब राशन: कई जगहों से बासी मसाले और खराब क्वालिटी का गुड़ मिलने की खबरें सामने आईं।
उल्लेखनीय: शिक्षा विभाग ने पिछले साल नवंबर में चना, सोयाबीन, राजमा, बेसन, रागी आटा, गुड़, दालें, तेल और मसाले सप्लाई करने के लिए हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के साथ एक साल का अनुबंध (Agreement) किया था।
शिक्षा विभाग के कड़े निर्देश
स्कूलों से मिली शिकायतों के बाद मौलिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs), जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEOs) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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नो कॉम्प्रोमाइज पॉलिसी: भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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तुरंत रिप्लेसमेंट: यदि आपूर्ति किया गया सामान खराब क्वालिटी का है, तो स्कूल हेड उसे तुरंत अस्वीकार कर बदलकर नया राशन मांगेंगे।
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अचानक निरीक्षण (Surprise Inspection): शिक्षा अधिकारियों को समय-समय पर स्कूलों का औचक निरीक्षण कर राशन और भोजन की गुणवत्ता जांचने के आदेश दिए गए हैं।


