यमुनानगर: हरियाणा के यमुनानगर में पुलिस और वन्य जीव विभाग की सतर्कता से वन्यजीव तस्करी के एक मामले का खुलासा हुआ है। गांधीनगर थाना क्षेत्र में गश्त के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध बाइक सवार को रुकने का इशारा किया। पुलिस को देखते ही आरोपी अपनी मोटरसाइकिल और बैग मौके पर छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गया।
पुलिस ने जब मौके पर पड़े बैग की तलाशी ली तो उसमें बड़ी संख्या में जीवित कछुए मिले। बैग से कुल 32 दुर्लभ और संरक्षित कछुए बरामद किए गए। इसके बाद पुलिस ने वन्य जीव विभाग को मामले की सूचना दी।
बैग खोला तो अंदर मिले दर्जनों कछुए
जानकारी के मुताबिक, घटना 2 सितंबर की रात करीब साढ़े 10 बजे की है। पुलिस टीम इलाके में नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान पुलिसकर्मी गुरदीप की नजर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी, जो मोटरसाइकिल से जा रहा था और उसकी पीठ पर एक भारी बैग लटका हुआ था।
पुलिस ने जब उसे रोककर पूछताछ करने की कोशिश की तो वह घबरा गया। इसके बाद आरोपी बाइक और बैग वहीं छोड़कर अंधेरे में फरार हो गया। पुलिसकर्मियों ने बैग की जांच की तो उसमें बड़ी संख्या में कछुए मौजूद थे।
22 इंडियन स्टार टॉरटोइज और 10 ब्लैक पॉन्ड टर्टल बरामद
मामले की जानकारी तुरंत वन्य जीव विभाग को दी गई। सूचना मिलने के बाद वन्य जीव संरक्षक संजीव कुमार और सुमित कुमार मौके पर पहुंचे और सभी कछुओं को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया।
वन्य जीव निरीक्षक लीलू राम के अनुसार, बरामद कछुओं में 22 इंडियन स्टार टॉरटोइज और 10 ब्लैक पॉन्ड टर्टल शामिल हैं। दोनों प्रजातियां संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में आती हैं और इनके अवैध कारोबार पर कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
विभाग की ओर से बरामद कछुओं को उनकी स्थिति के अनुसार सुरक्षित रखा गया है। इन्हें जल्द ही उनके अनुकूल प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आयुष सैनी के खिलाफ केस दर्ज, तस्करी के नेटवर्क की जांच
पुलिस ने फरार आरोपी की पहचान यमुनानगर के आनंद मार्केट निवासी आयुष सैनी के रूप में की है। उसके खिलाफ थाना सिटी यमुनानगर में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मामले की जांच एएसआई प्रदीप कुमार को सौंपी गई है। पुलिस आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी संख्या में दुर्लभ कछुए कहां से लाए गए थे और इन्हें आगे कहां पहुंचाया जाना था। साथ ही पुलिस और वन्य जीव विभाग इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि कहीं इस मामले के तार किसी बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।


