A 370 पर CJI चंद्रचूड़ का बड़ा बयान- नागरिकों के मौलिक अधिकार छीने गए

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अनुच्छेद 370 (Article 370) की सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ( CJI DY Chandrachud) ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने यह कहा कि अनुच्छेद 35-A ने भारत के नागरिकों के कई मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) को छीन लिया था। इसने जम्मू-कश्मीर के बाहर के निवासियों से रोजगार, अवसरों की समानता, संपत्ति प्राप्त करने का अधिकार छीन लिया है।

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि राज्य के किसी भी कार्यालय में नौकरी या नियुक्ति से संबंधित मामलों में भारत के सभी नागरिकों के लिए अवसरों की समानता, अचल संपत्ति प्राप्ति का अधिकार, और राज्य सरकार में रोजगार का अधिकार होता है। ये सभी अधिकार अनुच्छेद 35-A द्वारा नागरिकों से हर लिए गए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि यह अधिकार निवासियों के लिए विशेष थे और गैर-निवासियों के अधिकारों को प्रतिबंधित किया गया।

यह बयान तब दिया गया था जब केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल एसजी तुषार मेहता ने यह कहा था कि पिछली गलतियों का परिणाम आने वाली पीढ़ियों पर नहीं पड़ेगा।

सॉलिसिटर जनरल एसजी तुषार मेहता ने कहा कि सभी संविधानिक प्रावधानों को संशोधन के साथ लागू किया गया था। उन्होंने बताया कि धारा 370 को उसके “अस्थायी प्रावधान” के तौर पर देखा गया है, और यह तब तक लागू नहीं होगा जब तक धारा 35A के प्रावधानों को लागू नहीं किया जाता है।

मुख्य न्यायाधीश ने इसका उत्तर देते हुए कहा कि यह मानवाधिकारों की दृष्टि से अनुच्छेद 16(1) के तहत एक सीधा अधिकार था जिसे धारा 35A ने हर लिया। धारा 16(1) के तहत विशेष रूप से राज्य सरकार के नौकरियों में प्रवेश का अधिकार दिया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि धारा 35A ने सभी तीन मौलिक अधिकारों को सीधे छीन लिया, जिससे न्यायिक संरचना को भी क्षति पहुँची।

इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इसे 2019 तक ही सीमित रखा गया था और इस मुद्दे को जम्मू-कश्मीर के लोगों की दृष्टि से देखें। उद्योग क्षेत्र में, जम्मू-कश्मीर में पहले बड़े उद्योग नहीं थे, वरन मुख्य रूप से कुटीर उद्योग थे। परंतु पर्यटन ही आय का मुख्य स्रोत था। उसने बताया कि अब नए होटल खुलने के कारण लगभग 16 लाख पर्यटक आए हैं, जिससे रोजगार के अवसर मिलते हैं। जिस मुद्दे पर आपत्ति जताई जा रही है, वह एक संविधानिक प्रक्रिया है जो समानता और प्रगति को प्रोत्साहित करती है, और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए समर्थन प्रदान करती है।

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