कुरान जलाने पर स्वीडन-डेनमार्क में कभी भी हो सकता है बड़ा आतंकी हमला

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इंटरनेशनल डेस्क: स्वीडन (Sweden) और डेनमार्क (Denmark) में कुरान की प्रतियां जलाने (Quran Burning) की घटनाओं के पश्चात्, इन देशों में एक भय का माहौल बन गया है। कुरान की प्रतियां जलाने के घटनाओं का विरोध पूरी दुनिया ने किया था। मुस्लिम समुदाय में भी नाराजगी की भावना है। आतंकवादी संगठनों द्वारा चेतावनियां भी जारी की गई हैं। यह देखते हुए स्वीडन ने लेवल-2 के टेररिस्ट अलर्ट को जारी किया है, जबकि डेनमार्क ने भी अपनी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है। इस समय खतरा है कि बदले की भावना से आतंकवादी संगठन कभी भी हमला कर सकते हैं।

स्वीडन और डेनमार्क में कुरान की प्रतियां सामान्य बात हो गई है क्योंकि यहाँ इसके खिलाफ कोई कानून नहीं है। यहां फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के नाम पर लगभग हर वर्ष ऐसे ही घटनाएं होती हैं। स्वीडन की एक अदालत ने भी धार्मिक ग्रंथों के अपमान की छूट देने का निर्णय दिया था। क़ुरान के खिलाफस्वीडन में एक विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किया गया था, जिसकी कोर्ट ने अनुमति दी थी।

इस्लामिक देशों की मांग है कि यूरोपीय देशों में धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर सजा की होनी चाहिए। ईरान जैसे कई देशों ने कुरान के अपमान करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव के आसपास के समय कट्टर राजनीतिक दल ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

स्वीडन की सुरक्षा एजेंसी, सापो सिक्योरिटी सर्विस ने खतरे को 1 से 5 के स्केल पर बढ़ाकर 3 से 4 कर दिया है, जिससे पता चलता है कि यहाँ आतंकवादी हमले की संभावना है।

स्वीडिश सेना ने भी हमले की आशंका व्यक्त की है और ब्रिटेन और अमेरिका ने अपने नागरिकों को इन देशों की यात्रा से बचने की सलाह दी है। संभावित आतंकवादी हमलों की संभावना को देखते हुए, ब्रिटिश और अमेरिकी नागरिकों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे इन देशों में यात्रा नहीं करें। स्वीडन में 2017 में एक आतंकवादी हमले में पांच लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। उस समय एक यूजबेकिस्तानी प्रवासी ने ट्रक से पांच लोगों को कुचल दिया था।

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