सोने जितना कीमती है चन्द्रमा का बर्फ और पानी

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नेशनल डेस्क: भारत और रूस (India and Russia) के चंद्र मिशन (Moon Mission), भारत के चंद्रयान 3 (Chandrayaan-3) और रूस के लूना-25 (Luna-25) अगले सप्ताह चंद्र पर लैंड करने की योजना के कारण खबरों में हैं। दोनों ही अंतरिक्ष यान चंद्रमा (moon) के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेंगे, जिसे चंद्रमा की सबसे कठिन जगहों में से एक माना जाता है। यहां पर पानी और धूप दोनों होते हैं, जिसके कारण यह इसे लैंड करना बहुत मुश्किल बना देता है।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र वैज्ञानिकों के लिए हमेशा से रहस्यमय रहा है। यहां पर कुछ जगहों पर पूरी तरह से अंधकार होता है जबकि कुछ जगहों पर रौशनी उपलब्ध होती है। इसके साथ ही पानी और धूप दोनों मौजूद होते हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में शीतलता अनुभव की जाती है और कहा जाता है कि यहां बर्फ जम सकती है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के कुछ हिस्सों में सूरज की रौशनी कभी नहीं पहुंची है। यहां के कुछ गड्ढों में तापमान -203 डिग्री सेल्सियस तक भी जा सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यहां की बर्फ अंतरिक्ष के सोने के समान मूल्यवान संसाधनों में शामिल होती है। इसे पानी के बदले में उपयोग किया जा सकता है, साथ ही आवश्यक ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन के लिए भी यह उपयोगी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, यह ईंधन न केवल पारंपरिक अंतरिक्ष यात्रियों के लिए, बल्कि विभिन्न उपग्रहों के लिए भी उपयोगी हो सकता है जो विभिन्न उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष में भेजे जाते हैं। चंद्रमा पर पहली रोबोटिक लैंडिंग को बीते 60 साल हो चुके हैं, हालांकि इसे लैंड करना अब भी बड़ी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। अब तक लॉन्च किए गए मिशनों में से बहुत कम कामयाब हुए हैं, और अधिकांश लैंडिंग का प्रयास असफल रहा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती से अलग चंद्रमा का वातावरण बहुत हल्का है, जिसका मतलब यह है कि इसकी गुरुत्वाकर्षण धरती के छठे हिस्से के बराबर है। इसके कारण इसे लैंड करने के समय की स्‍पीड को कम करने के लिए उपयोगी खिचाव नहीं होता है। इसके अलावा, चंद्रमा पर किसी भी यान को उसके लैंडिंग स्थल तक पहुंचाने के लिए कोई जीपीएस जैसी तकनीक नहीं होती है। इन कमियों की वजह से दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करना काफी चुनौतीपूर्ण काम बन जाता है।

चंद्रमा पर मौजूद कीमती संसाधन भारत और रूस के साथ ही दुनियाभर के देशों के लिए रोचक विषय बने हुए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यदि रॉकेटों के लिए भारी ईंधन उपलब्ध नहीं हो, तो आगामी समय में अंतरिक्ष यात्राओं के खर्च में भारी कटौती हो सकती है। इसका मतलब यह है कि चंद्रमा को एक ब्रह्मांडीय गैस स्टेशन की तरह उपयोगिता देने की संभावना है। ज्योलॉजिकल और माइनिंग कंपनियों के अनुसार, आने वाले 30 सालों में सिर्फ चंद्रमा पर पाए जाने वाले पानी की मांग ही 206 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री बन सकती है।

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