जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल की फ़िल्मी कहानी

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नई दिल्ली: कुछ वर्षों पहले, अरबों खरबों में खेलने वाले जेट एयरवेज (Jet Airways) के मालिक नरेश गोयल (Naresh Goyal) आज जेल की सलाखों के पीछे हैं। एक बैंक धोखाधड़ी के मामले में ईडी (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया है। नरेश गोयल ने अपना करियर 300 रुपये की मासिक नौकरी के साथ शुरू किया था। चलिए, हम उनके जेट एयरवेज के मालिक बनने के सफर और फिर अर्श से फर्श पर पहुँचने की कहानी को जानते हैं।

दिसंबर 1949 में पंजाब के संगरूर में नरेश गोयल का जन्म हुआ था। उनके पिता कारोबारी थे, लेकिन उनके पिता की अचानक मौत के बाद, उनका परिवार मुश्किलों में फंस गया। जब वह 11 साल के थे, तो उनका परिवार वित्तीय संकट से जूझ रहा था। उस समय सरकार और बैंक की कार्रवाई से गोयल परिवार की सम्पूर्ण संपत्ति चली गई। इसके बाद, उनके मामा ने उनकी शिक्षा का खर्च उठाया। उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया और 1967 में एक ट्रैवल एजेंसी में कैशियर की नौकरी की। वहाँ पर उन्हें महीने के 300 रुपये का वेतन मिलता था।

इसके बाद, नरेश लेबनानी इंटरनेशनल एयरलाइंस के लिए जीएसए ट्रैवल एजेंसी से जुड़ गए। 1967 से 1974 के बीच, गोयल ने कई विदेशी एयरलाइंस के साथ काम किया और ट्रैवल एजेंसी से अनगिनत अनुभवों को हासिल किया। इस अवधि में, उन्होंने विदेशों की यात्राएं भी की। उनकी मेहनत और समर्पण के चलते, 1969 में उन्हें इराकी एयरलाइंस के पीआर मैनेजर के रूप में नियुक्त किया गया। 1971 में, गोयल रॉयल जॉर्डन एयरलाइंस में रीजनल मैनेजर बने और 1974 तक इस पद पर काम किया।

इसके बाद, उन्होंने अपनी ट्रैवल एजेंसी शुरू करने का निर्णय लिया, और 1974 में ही अपनी मां से पैसे उधार लेकर काम शुरू किया। उन्होंने अपनी एजेंसी का नाम ‘जेटएयर’ रखा। जेटएयर ने एयर फ्रांस, ऑस्ट्रियन एयरलाइंस, और कैथी पैसिफिक एयरलाइन के सेल्स और मार्केटिंग काम किया। उन्होंने 1975 में फिलिप एयरलाइन्स के रीजनल मैनेजर के रूप में काम किया, और 1992 में भारत सरकार ने ओपन स्काईज नीति की घोषणा की तो उन्होंने 1992 में एयरलाइन कंपनी शुरू की। ट्रैवल एजेंसी ‘जेटएयर’ का नाम बदलकर उन्होंने इसे ‘जेट एयरवेज’ में बदल दिया।

जेट एयरवेज ने 1993 में देश में अपने परिचालन की शुरुआत की, और 2004 तक इंटरनेशनल फ्लाइट सेवाओं की भी शुरुआत की। 2007 में, जेट एयरवेज ने एयर सहारा का अधिग्रहण किया, और 2010 तक यह देश की सबसे बड़ी एयरलाइन बन गई। कई वर्षों तक, सब कुछ अच्छी तरह से चल रहा था, लेकिन उनकी कंपनी के लिए मुसीबतें बढ़ गईं, और मार्च 2019 में उन्हें अपने पद से हटना पड़ा।

2000 के दशक में, उनके खिलाफ एक पीआईएल की तरफ से एक मामला दर्ज किया गया, जिसमें उनके ऊपर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ संदिग्ध संबंधों का आरोप था। इसके अलावा, यह भी कहा गया कि जेट एयरवेज की स्थापना दाऊद ने की थी। संदिग्ध लेन-देन के मामले में, ईडी ने उन पर फेमा के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के मामले का आरोप लगाया। 2019 में उन्होंने जेट एयरवेज के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।

जेट एयरवेज का संचालन भी बंद हो गया, और इसके प्रमोटर नरेश गोयल पर ईडी का मुकदमा चल रहा है। ईडी ने गोयल समेत कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। दिल्ली से लेकर मुंबई तक उनके आठ स्थानों पर छापेमारी हुई है, और उनकी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। जांच एजेंसी ने अब केनरा बैंक की शिकायत के आधार पर एक नया मामला दर्ज किया है, जिसमें कहा गया है कि उसने जेट एयरवेज (इंडिया) के लिए 848.86 करोड़ रुपये का कर्ज मंजूर किया था, जिसमें से अब भी 538.62 करोड़ रुपये बकाया है। अब नरेश गोयल की गिरफ्तारी इसी बैंक फ्रॉड के मामले में हुई है।

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