भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ SRK : सुरजेवाला, किरण-सैलजा का क्या है प्लान?

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हरियाणा में आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस पार्टी चार अलग-अलग गुटों में विभाजित हो गई है, लेकिन वर्तमान में तीन प्रमुख नेता ररणदीप सुरजेवाला, किरण चौधरी और कुमारी सैलजा के एक साथ आने से सभी को हैरत में डाल दिया है। ध्यान देने योग्य है कि ये तीनों नेता सभी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा, के विरोधी माने जाते हैं। आखिर एक दूसरे के खिलाफ रहने वाले हुड्डा के खिलाफ एकजुट क्यों हो गए हैं?

वर्तमान में हरियाणा कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बड़ा नेता कोई नजर नहीं आता है । उनके सामने हाईकमान को भी झुकना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि आगे भी हुड्डा ही को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा में हाईकमान के सामने अपनी मनमर्जी चलाते रहे हैं।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ इन तीनों नेताओं ने मिलकर एकजुट होने का फैसला किया है। यह पहली बार है कि ये तीनों नेता एक साथ आए हैं और कई मौकों पर साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की है। मीडिया ने जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अनुपस्थिति की बात पूछी, तो उन्होंने हर बार नज़रअंदाज़ किया। तीनों नेताओं ने पहले 4 जुलाई को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, हम कांग्रेस के सिपाही हैं और हमें केवल मछली की आंख दिख रही है।

कुमारी सैलजा, रंजीत सुरजेवाला और किरण चौधरी अब अपनी पकड़ को बाकी जिलों में भी मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे न केवल उन्हें व्यक्तिगत लाभ मिलेगा, बल्कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कमजोर करने का भी एक मौका मिलेगा। हालांकि, इन तीनों नेताओं की विधानसभा चुनाव के लिए टिकट तो पक्का है, लेकिन अपने गुट के नेताओं को टिकट पक्का कराने के लिए अब वे शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि टिकट वितरण के समय वे अपने खास नेताओं का ध्यान रख सकें।

हाल के दिनों में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को परेशानी हो गई है, क्योंकि उन्होंने खुद भी नहीं सोचा था कि कुमारी सैलजा, रंजीत सुरजेवाला और किरण चौधरी एक होकर उन्हें चुनौती देने की कोशिश करेंगे। आगामी मुख्यमंत्री के नारे लगते हैं. लेकिन अब कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला के लिए भी मुख्यमंत्री के नारे लगने लगे हैं.

कहते हैं भूपेंद्र सिंह हुड्डा बोलते नहीं, लेकिन अपनी ही पार्टी के नेताओं को किनारा लगाने में भी समय नहीं लगाते। यह नहीं हम, बल्कि इतिहास इसका प्रमाण देता है। साल 2004 में भजन लाल को दरकिनार कर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाया गया था। यह उनकी योजना थी या फिर नसीब उनके साथ मिल गया, दोनों ही सही साबित हुआ। इसके बाद से भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी पार्टी के उन नेताओं को निकालने का काम शुरू किया। इस तालिका में राव इंद्रजीत सिंग्ह, कुलदीप बिश्नोई, अशोक तंवर, कैप्टन अजय यादव समेत कई ऐसे नेता हैं, जिनकी भूपेंद्र सिंह हुड्डा से बनी नहीं । इस वजह से कई नेताओं ने पार्टी को अलविदा कह दिया और कुछ ने अपनी अलग राह चुन ली। इस बार भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बीजेपी से भी टक्कर लेनी होगी, और साथ ही पार्टी के अंदर ही गुटों का सामना भी करना होगा।

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