Hindenburg 2.0: मोदी विरोधी सोरोस के OCCRP ने अडानी पर लगाया घोटाले का आरोप

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नई दिल्ली: संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग परियोजना (OCCRP) ने गुरुवार को दावा किया है कि मॉरीशस में स्थित अपारदर्शी फंडों ने अडानी ग्रुप (Adani Group) के शेयर में लाखों डॉलर का निवेश किया है। जॉर्ज सोरोस (George Soros) और रॉकफेलर ब्रदर्स फंड जैसे संगठनों की तरफ से वित्त पोषित संगठनों द्वारा ताजा आरोप लगाए गए हैं, जब कुछ महीने पहले ही एक अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग (Hindenberg Report) ने अरबपति गौतम अडानी (Gautam Adani) द्वारा संचालित बंदरगाह-से-ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाले समूह पर लेखा धोखाधड़ी, स्टॉक मूल्यों में हेरफेर और टैक्स हेवन के अनुचित उपयोग के आरोप लगाए थे। इस खुलासे के बाद, अडानी समूह के शेयरों की मूल्य में लगभग 150 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि अडानी समूह ने सभी आरोपों की खण्डन किया है।

कई टैक्स हेवन देशों की फाइलों और अदाणी समूह के आंतरिक ई-मेल की समीक्षा का संदर्भ देते हुए, ओसीसीआरपी ने कहा कि उनकी जांच में कम से कम दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ ‘रहस्यमयी’ निवेशकों ने इस तरह के ऑफशोर स्ट्रक्चर (गुमनाम फंड्स) के माध्यम से अडानी ग्रुप के शेयर खरीदे और बेचे।

ओसीसीआरपी ने दावा किया कि अडानी परिवार के साथ रहस्यमय निवेशकों नासिर अली शबान अहली और चैंग चुंग-लिंग लम्बे समय से व्यापारिक संबंध हैं और विनोद अडानी के बड़े भाई गौतम अडानी के समूह की कंपनियों और फर्मों में ये निवेशक निदेशक और शेयरधारक के रूप में भी काम कर चुके हैं। आरोप लगाया गया है कि दस्तावेजों से पता चलता है कि उनके निवेश की प्रभारी प्रबंधन कंपनी ने विनोद अडानी कंपनी को उनके निवेश में सलाह देने के लिए भुगतान किया।

अडानी समूह ने ओसीसीआरपी के आरोपों का खंडन किया और बयान जारी करके कहा, “हम इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। ये समाचार रिपोर्टें सोरोस से वित्त पोषित विदेशी मीडिया के एक वर्ग द्वारा जानबूझकर प्रकाशित की जा रही हैं। ये मेरिटलेस हिंडनबर्ग रिपोर्ट को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। वास्तव में, ऐसे अनुमान पहले ही लगाए गए थे, पिछले हफ्ते मीडिया में भी ऐसे दावे किए गए थे। ये दावे एक दशक पहले ही बंद हो चुके मामलों पर आधारित हैं। उस समय, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने ओवर इनवॉयसिंग, विदेश में धन के हस्तांतरण, संबंधित पार्टी लेनदेन और एफपीआई के माध्यम से निवेश के आरोपों की जांच की थी।” अडानी समूह ने ओसीसीआरपी को बताया कि मॉरीशस के फंड का नाम पहले ही अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिपोर्ट में आ चुका है और ये आरोप न केवल निराधार और अप्रमाणित हैं, बल्कि हिंडनबर्ग के आरोपों से अलग हैं।

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