ज्ञानवापी मस्जिद है तो परिसर में त्रिशूल और हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां क्‍यों हैं?

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नेशनल डेस्क: ज्ञानवापी के बारे में न्यायिक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को एएसआई (आर्किटेक्चरल सर्वे इंडिया) का सर्वे फिर से कराने का आदेश दिया है। शुक्रवार को इस प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है। इस विवाद के बीच, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ज्ञानवापी को लेकर चिंता का सवाल उठाया है। उन्होंने सवाल किया कि ज्ञानवापी अगर वास्तव में एक मंदिर है तो इसमें त्रिशूल और हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं कैसे हैं? इससे पहले भी हिंदू पक्षकार ने यह दावा किया है कि ज्ञानवापी को मस्जिद की जगह पर बनाया गया है। जबकि मुसलमानों का मानना है कि ज्ञानवापी को 600 साल से खड़ा किया गया है और वहां नमाज पढ़ी जाती है।

ज्ञानवापी परिसर का रूपरंग देखने पर साफ है कि वहां कुछ अनोखे और मिश्रित तत्व हैं। इसके पश्चिमी दीवार पर घंटी की आकृतियां बनी हुई हैं, जिनमें श्री और ॐ लिखे हुए हैं। मस्जिद के ओर मुंह किए हुए नंदी की विशाल मूर्ति भी देखी जा सकती है। इसी परिसर में मां शृंगार गौरी, भगवान गणेश, हनुमान, आदि विश्वेश्वर, नंदीजी और कई अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थान पाई जाती हैं।

स्‍कंद पुराण में भगवान शिव ने स्वयं त्रिशूल से बनाए जाने का उल्लेख किया गया है, जिसे ज्ञान प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है। ज्ञानवापी के जल को पीकर मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति होती है, ऐसा कहा जाता है। इसलिए ज्ञानवापी का अर्थ होता है ज्ञान का तालाब। ज्ञानवापी का जल श्री काशी विश्वनाथ पर चढ़ाया जाता था, जो इस विवाद के पक्षकारों के विचारों का मजबूत प्रमाण देने के लिए अहम है।

इस नए सर्वे के नतीजे से इस विवाद के असली सच्चाई का पता चलेगा और लोगों के बीच की विभाजनवादी दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला जा सकेगा। विवादित जगह पर न्यायिक निर्णय का पालन किया जाना चाहिए, ताकि समाज में सद्भाव बना रहे और धार्मिक स्थलों के सम्बंध में सही जानकारी प्राप्त हो सके। ज्ञानवापी के संबंध में उठे विवाद का समाधान शांतिपूर्ण रूप से हो, इसकी कामना की जा सकती है।

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