जब मेवात के मुसलमानों को महात्मा गाँधी ने पाकिस्तान जाने से रोका

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    नेशनल डेस्क: हरियाणा के नूहं शहर में हुए दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने सोमवार (31 जुलाई 2023) को जलाभिषेक यात्रा में शामिल हजारों हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया था। इस आतंकी हमले में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की कोशिश की। हालांकि, इस फायरिंग के बाद भी दुर्भाग्यवश भीड़ ने भागने की बजाय मंदिर की तरफ जा रहीं गाड़ियों को जलाना शुरू कर दिया। ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाती हुई हिंसक भीड़ ने वाहनों पर पेट्रोल बम फेंक दिया और आग लगा दी। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। दंगाई मुसलामानों ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे क्यों लगाए और कैसे इस घटना के पीछे महात्मा गाँधी ज़िम्मेदार है हम बताते हैं।

    मेवात के इस घटनाक्रम से जुड़ी ख़बरों के अनुसार, मेवात में रहने वाले मुसलमानों को “मेव मुसलमान” के रूप में जाना जाता है, जिन्हें महात्मा गांधी ने भारत की रीढ़ की हड्डी तक बताया था। इससे साथ ही, मेवात का भारत की आज़ादी, विभाजन और महात्मा गांधी के साथ गहरा नाता है।

    भारत की आज़ादी के साथ ही, जब मुल्क दो टुकड़ों में विभाजित हुआ तो एकाएक देश में कई जगह दंगे भड़क उठे। मेवात में रहने वाले मुसलमान भी राजस्थान के भरतपुर जिले में इन दंगों का शिकार हुए। राजस्थान के भरतपुर जिले में हुए भारी नरसंहार में किसी तरह ख़ुद को बचाते हुए मेवात के प्रतिनिधि महात्मा गांधी के पास पहुँचे। उस समय एक नारा चला करता था – “नरसंहार या पाकिस्तान”। और मेवाती मुसलमान इससे बचने के लिए पाकिस्तान जाने को सिर्फ तैयार ही नहीं हुए थे , बल्कि कई मुसलमान सरहद तक पहुँच भी गए।

    उस समय दिल्ली के शाहदरा, दरियागंज, बेगमपुर, करोल बाग और पहाड़गंज आदि इलाकों में भी दंगे भड़क उठे थे। हालांकि, महात्मा गांधी दिल्ली के बिड़ला हाउस में मौजूद थे और दंगों को रोकने की कोशिश कर रहे थे।

    इसी दौरान बीस सितंबर, 1947 को एक प्रार्थना सभा के दौरान मेव नेता चौधरी यासीन ख़ान ने गांधी जी को बताया कि मेवात के हज़ारों मुसलमान पाकिस्तान जाने को तैयार हैं। गांधी जी इस बात से विचलित हो गए। उन्होंने ख़ुद मेवात जाने का फ़ैसला किया ताकि पाकिस्तान जाने को तैयार बैठे मुसलमानों को सरहद के उस पार जाने से रोक सकें।

    यासीन ख़ान से इस मुलाक़ात के कुछ हफ़्ते बाद गांधी जी मेवात के घासेड़ा गांव पहुंचे, जिसके लिए उन्हें बिड़ला हाउस से क़रीब दो-तीन घंटे लगे होंगे। इस दौरान धौला कुआं के सामने क़ायदे की सड़कें ना के बराबर हुआ करती थी। घासेड़ा में राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिलों के सैकड़ों मुसलमान कैंपों में रह रहे थे, जो पाकिस्तान जा रहे थे। इस वक्त, गांधी जी ने घासेड़ा पहुंचते ही मेव मुसलमानों को लगभग आदेशात्मक स्वर में कहा कि उन्हें पाकिस्तान जाने की कोई ज़रूरत नहीं है। वे भारत के हैं और भारत उनका है। वे भारत की रीढ़ की हड्डी हैं। इस सूचना के समाचार सुनते ही वहां पर मौजूद मुसलमानों ने इस्लामिक पाकिस्तान जाने का इरादा त्याग दिया।

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