नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी करीब तीन दशक से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। उन्होंने साल 1996 में फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई। ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ के सर्किट से लेकर ‘असुर’ के धनंजय राजपूत तक, अरशद ने अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों के बीच मजबूत जगह बनाई है।
अरशद वारसी किसी फिल्मी परिवार से नहीं आते और उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी पहचान खुद बनाई है। हाल ही में एक इंटरव्यू में अभिनेता ने बॉलीवुड में लंबे समय से चर्चा में रहे नेपोटिज्म के मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें नेपोटिज्म से कोई खास परेशानी नहीं है।
‘नेपोटिज्म से मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता’
फिल्मीज्ञान को दिए इंटरव्यू में अरशद वारसी ने कहा कि वह नेपोटिज्म को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होते। अभिनेता के मुताबिक, जब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, उस दौर में नेपोटिज्म को लेकर आज जैसी चर्चा नहीं होती थी।
उन्होंने इस मुद्दे को मुख्यधारा की बहस में लाने का श्रेय अभिनेत्री कंगना रनौत को दिया। अरशद ने कहा कि कंगना रनौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस काफी तेज हुई और यह इंडस्ट्री से जुड़े सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल हो गया।
मौका मिलना और इंडस्ट्री में टिकना अलग-अलग चीजें
इंटरव्यू के दौरान अरशद वारसी से पूछा गया कि जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तब फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म को किस तरह देखा जाता था। इस पर अभिनेता ने कहा कि उनके हिसाब से किसी फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति को शुरुआत में आसानी से मौका मिल सकता है, लेकिन सिर्फ इस वजह से वह लंबे समय तक इंडस्ट्री में टिक नहीं सकता।
अरशद ने समझाया कि मौका मिलना और सफलता हासिल करना दो अलग बातें हैं। किसी को परिवार या पहचान के कारण जल्दी फिल्म मिल सकती है, लेकिन उस मौके को सफलता में बदलने के लिए प्रतिभा और मेहनत जरूरी है।
उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति को आसानी से मौका मिल जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह फिल्म इंडस्ट्री में सफल भी होगा। आखिरकार लंबे समय तक टिके रहने के लिए कलाकार का हुनर ही सबसे अहम भूमिका निभाता है।
अरशद वारसी की यह बात इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने खुद बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के इंडस्ट्री में कदम रखा और करीब 30 वर्षों के करियर में अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए अपनी पहचान बनाई है।


