गुरुग्राम: पटौदी रोड पर खवासपुर गांव के पास हुए सड़क हादसे में दिल्ली पुलिस के 32 वर्षीय कॉन्स्टेबल अमित यादव की जान चली गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। इस दौरान कुछ लोग मोबाइल फोन से वीडियो बनाते नजर आए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, सामने आए वीडियो में एंबुलेंस बुलाने और पुलिस को सूचना देने की बात भी सुनाई देती है। ऐसे में शुरुआती समय में घायल को मदद कितनी जल्दी मिली, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
ट्रक से टकराई बाइक, अस्पताल में तोड़ा दम
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे अमित यादव बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान पटौदी रोड पर खवासपुर गांव के पास उनकी बाइक राजस्थान नंबर के एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि अमित गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद उन्हें गुरुग्राम के सिल्वर स्ट्रीक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, अधिक खून बहना उनकी मौत की संभावित वजह बताई गई है।
जंतर-मंतर पर लगी थी ड्यूटी
अमित यादव दिल्ली के कल्याणपुरी थाने में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे। पिछले कुछ दिनों से उनकी ड्यूटी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान लगाई गई थी। प्रदर्शन के मद्देनजर वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
इसी ड्यूटी के बीच गुरुग्राम में हुए सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। उनके निधन की खबर से परिवार और परिचितों में शोक छा गया।
पीछे छोड़ गए पत्नी और दो बेटियां
अमित यादव गुरुग्राम के बिलासपुर क्षेत्र के गांव बासलांबी के निवासी थे। परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं। वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनकी एक बहन भी है, जिसकी शादी हो चुकी है।
परिवार के लिए यह हादसा बेहद दुखद है। दो छोटी बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया, वहीं माता-पिता ने अपना इकलौता बेटा खो दिया। गांव में भी शोक का माहौल है।
हादसे के बाद मदद जरूरी या वीडियो बनाना?
अमित यादव का हादसा सड़क दुर्घटनाओं के दौरान लोगों की जिम्मेदारी को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। घटनास्थल पर कुछ लोगों का वीडियो बनाना चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, वीडियो में एंबुलेंस और पुलिस को सूचना देने की बात भी सुनाई देती है, इसलिए यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि वहां किसी ने मदद नहीं की।
लेकिन ऐसी घटनाओं में सबसे जरूरी बात यह है कि घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता मिले। सड़क पर किसी को गंभीर हालत में देखकर लोगों को तुरंत आपातकालीन सेवाओं को सूचना देनी चाहिए और सुरक्षित तरीके से मदद के लिए आगे आना चाहिए।
अमित यादव की मौत ने उनके परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दिया है। यह घटना समाज को एक अहम संदेश भी देती है कि संकट की घड़ी में किसी की मदद करना सबसे बड़ी इंसानियत है।


