नई दिल्ली: क्रिकेट की दुनिया में ऐसे कई खिलाड़ी रहे हैं, जिनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू मैच ही उनके करियर का आखिरी मैच साबित हो गया। हालांकि, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है, क्योंकि आमतौर पर टीम मैनेजमेंट किसी खिलाड़ी को सिर्फ एक मुकाबले के प्रदर्शन के आधार पर बाहर नहीं करता। भारतीय क्रिकेट में जयदेव उनादकट का करियर भी कुछ ऐसा ही रहा, जहां घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें टीम इंडिया में लगातार मौके नहीं मिल सके।
जयदेव उनादकट ने साल 2010 में भारतीय टेस्ट टीम में कदम रखा था। उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन में टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला। हालांकि, इस मुकाबले में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद उन्हें दोबारा टेस्ट क्रिकेट में वापसी करने के लिए करीब 12 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा।
डेब्यू के बाद 12 साल का इंतजार
उनादकट के टेस्ट डेब्यू के समय भारतीय टीम बदलाव के दौर से गुजर रही थी। पहले टेस्ट में प्रभावित नहीं कर पाने के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद रेड-बॉल क्रिकेट में उनकी वापसी नहीं हो सकी।
करीब 12 साल बाद उन्हें एक बार फिर भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली। लंबे इंतजार के बाद मिले इस मौके को भी वह पूरी तरह भुना नहीं सके। यही वजह रही कि उनका टेस्ट करियर महज चार मुकाबलों तक ही सीमित रह गया।
टेस्ट क्रिकेट में उनादकट के आंकड़े भी बहुत प्रभावशाली नहीं रहे। भारत के लिए खेले चार टेस्ट मैचों में उन्होंने सिर्फ तीन विकेट हासिल किए।
वनडे और टी20 में भी नहीं बना पाए स्थायी जगह
टेस्ट के अलावा जयदेव उनादकट ने भारत के लिए वनडे और टी20 क्रिकेट में भी अपनी किस्मत आजमाई। उन्होंने टीम इंडिया के लिए कुल 8 वनडे और 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले।
टी20 क्रिकेट में कुछ मौकों पर उनका प्रदर्शन उम्मीद जगाने वाला रहा, लेकिन वह लंबे समय तक टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर सके। भारत के लिए खेले 10 टी20 मैचों में उनके नाम 14 विकेट हैं, जबकि 8 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 9 विकेट चटकाए।
घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनादकट को स्थायी सफलता नहीं मिल सकी। यही वजह है कि प्रतिभा और अनुभव होने के बावजूद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर उम्मीद के मुताबिक लंबा नहीं हो पाया।


