जालंधर। जालंधर स्थित श्री सिद्ध बाबा सोढल मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष अनंत चतुर्दशी के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त बाबा सोढल के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए मन्नत मांगते हैं।
अनंत चतुर्दशी से पहले ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़नी शुरू हो जाती है। मेले के दौरान पूरा जालंधर भक्तिमय माहौल में नजर आता है। श्रद्धालुओं के लिए जहां मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं, वहीं मनोरंजन और खरीदारी के लिए मेले में बड़े-बड़े झूले, खान-पान के स्टॉल और विभिन्न प्रकार की दुकानें सजाई जाती हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेले के दौरान करीब 1500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिसकर्मी मंदिर परिसर, आसपास के बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।
इसके अलावा भीड़ की निगरानी और असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों की भी मदद ली जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और पूरे आयोजन को सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जा सके।
आनंद और चड्ढा परिवार से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा
श्री सिद्ध बाबा सोढल मेले का इतिहास पुरानी धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि इस धार्मिक उत्सव की शुरुआत सदियों पहले आनंद और चड्ढा परिवारों से जुड़ी परंपराओं के माध्यम से हुई थी।
मेले से एक दिन पहले इन परिवारों के सदस्य मंदिर परिसर में एकत्र होते हैं और धार्मिक परंपराओं को निभाते हैं। समय के साथ यह परंपरा किसी एक परिवार या बिरादरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे समाज की आस्था का हिस्सा बन गई। आज अलग-अलग समुदायों और वर्गों के लोग बाबा सोढल के दरबार में पहुंचकर श्रद्धा से शीश झुकाते हैं।
मन्नत पूरी होने पर चढ़ाया जाता है रोट का प्रसाद
बाबा सोढल के दरबार से जुड़ी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर भक्त बाबा सोढल को श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित करते हैं। इनमें रोट का प्रसाद विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंदिर से जुड़ी प्रसाद की एक अनोखी स्थानीय परंपरा भी है। मान्यता के अनुसार बाबा सोढल को चढ़ाया गया प्रसाद घर की बेटी ही ग्रहण करती है। बेटी के पति यानी दामाद और उसके बच्चों को यह प्रसाद देने की परंपरा नहीं है।
इसी तरह की धार्मिक मान्यताओं, सदियों पुरानी परंपराओं और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के कारण श्री सिद्ध बाबा सोढल का मेला जालंधर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ शहर को पूरी तरह भक्तिमय माहौल में बदल देती है।


