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पंजाब में पराली जलाने की 404 घटनाएं दर्ज, 151 मामलों में हुई पुष्टि; 7.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

पटियाला : पंजाब में धान की पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की 20 अक्टूबर तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने की कुल 404 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 358 खेतों का निरीक्षण किया गया, जबकि 151 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है।

 

तरनतारन और अमृतसर में सबसे ज्यादा घटनाएं

रिपोर्ट के मुताबिक, तरनतारन और अमृतसर पराली जलाने की घटनाओं के मामले में प्रमुख जिले बनकर सामने आए हैं। तरनतारन में 198 घटनाएं दर्ज की गईं। यहां 176 खेतों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 75 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। वहीं, अमृतसर में 117 घटनाएं सामने आईं। जिले में 111 खेतों की जांच की गई और 42 मामलों में पराली जलाने की पुष्टि हुई।

इसके अलावा, गुरदासपुर में 23, कपूरथला में 16 और फिरोजपुर में 14 घटनाएं दर्ज की गई हैं। जालंधर में पराली जलाने की पांच, जबकि पटियाला में चार घटनाएं सामने आईं। पटियाला में तीन खेतों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से दो स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। इन मामलों में 10,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है।

7.20 लाख रुपये का मुआवजा, 39 एफआईआर दर्ज

पीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने से संबंधित मामलों में अब तक कुल 7.20 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा चुका है। इसमें से 3.40 लाख रुपये की वसूली भी की गई है।

कार्रवाई के तहत अब तक 39 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि 106 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। इसके अतिरिक्त, संबंधित अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करने वालों को 152 चेतावनी नोटिस जारी किए हैं।

30 नवंबर तक निगरानी करेंगे फ्लाइंग स्क्वॉड

धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब में विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं। ये उड़न दस्ते 30 नवंबर तक खेतों में जाकर निगरानी करेंगे और पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखेंगे।

धान की कटाई के पूरे सीजन के दौरान निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए इन टीमों की तैनाती अलग-अलग चरणों में की गई है। जिलों में उनकी तैनाती की अवधि भी अलग-अलग निर्धारित की गई है, ताकि खेतों में लगातार निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

सीएक्यूएम की इस व्यवस्था के तहत पंजाब के प्रमुख धान उत्पादक जिलों को शामिल किया गया है। इनमें संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मालेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं।

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