HomeDharamमहाभारत में अर्जुन के रथ की ध्वजा पर क्यों विराजमान थे हनुमान...

महाभारत में अर्जुन के रथ की ध्वजा पर क्यों विराजमान थे हनुमान जी? जानें पूरी कथा

Dharam Gyan: महाभारत की कथा में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन का संबंध जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही रहस्यमयी अर्जुन के रथ की ध्वजा का भी माना जाता है। कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन के रथ पर एक विशेष ध्वजा लगी थी, जिस पर स्वयं पवनपुत्र हनुमान विराजमान थे। इसी कारण अर्जुन के रथ को कपिध्वज कहा जाता है। लेकिन सवाल उठता है कि हनुमान जी अर्जुन की ध्वजा पर कैसे आए और इसके पीछे क्या कथा है?

भीम से जुड़े हैं हनुमान जी के संबंध

पौराणिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी और भीम दोनों ही पवन देव के पुत्र माने जाते हैं। इस कारण दोनों भाइयों का संबंध बताया जाता है। महाभारत में एक प्रसंग आता है, जब वनवास के दौरान भीम की मुलाकात हनुमान जी से होती है।

कथा के अनुसार हनुमान जी वृद्ध वानर का रूप धारण करके मार्ग में लेटे हुए थे। भीम ने उनसे रास्ते से हटने को कहा। हनुमान जी ने अपनी पूंछ हटाने के लिए कहा, लेकिन अत्यंत शक्तिशाली भीम भी उनकी पूंछ को हिला नहीं सके। तब उन्हें अपनी शक्ति और अहंकार की सीमा का एहसास हुआ।

हनुमान जी ने भीम को अपना वास्तविक स्वरूप बताया और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी प्रसंग में उन्होंने महाभारत के युद्ध से जुड़ा एक महत्वपूर्ण वचन भी दिया।

अर्जुन की ध्वजा पर क्यों आए हनुमान?

एक अन्य प्रसिद्ध कथा के अनुसार अर्जुन की मुलाकात हनुमान जी से हुई। अर्जुन ने रामायण के प्रसंगों को लेकर अपनी बात रखी और हनुमान जी के सामने अपनी धनुर्विद्या का प्रदर्शन किया। इसके बाद दोनों के बीच संवाद हुआ।

भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति और इच्छा से हनुमान जी अर्जुन के प्रति प्रसन्न हुए। उन्होंने अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान होने का वचन दिया। इसी वजह से अर्जुन की ध्वजा पर हनुमान जी का स्वरूप दिखाई देता है और अर्जुन को कपिध्वज कहा जाता है।

युद्ध में क्या था इसका महत्व?

धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी की उपस्थिति अर्जुन के रथ को अद्भुत शक्ति और सुरक्षा प्रदान करती थी। महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण सारथी और हनुमान जी ध्वजा पर थे। इस तरह अर्जुन के रथ पर विष्णु अवतार श्रीकृष्ण और रामभक्त हनुमान की उपस्थिति का एक अनोखा धार्मिक प्रतीक दिखाई देता है।

महाभारत के अंत में जब युद्ध समाप्त हुआ, तब श्रीकृष्ण ने पहले अर्जुन को रथ से उतरने के लिए कहा। अर्जुन के उतरने के बाद श्रीकृष्ण स्वयं रथ से उतरे और उसके बाद हनुमान जी ध्वजा से अंतर्धान हो गए। इसके तुरंत बाद रथ जलकर भस्म हो गया। धार्मिक मान्यता में इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि रथ अब तक श्रीकृष्ण और हनुमान जी की दिव्य उपस्थिति से सुरक्षित था।

इसीलिए अर्जुन की कपिध्वज केवल युद्ध की ध्वजा नहीं, बल्कि भक्ति, शक्ति, विनम्रता और धर्म की विजय का प्रतीक मानी जाती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments