लुधियाना। लुधियाना से कांग्रेस सांसद और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री स्वर्गीय बूटा सिंह को लेकर एक चुनावी सभा में कथित आपत्तिजनक और जातिसूचक टिप्पणी के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने सख्त रुख अपनाया है।
आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना की अध्यक्षता में सोमवार को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान स्वर्गीय बूटा सिंह के बेटे सरबजोत सिंह के अलावा तरनतारन के डीएसपी हरप्रीत सिंह और डीएसपी गुलजार सिंह भी मौजूद रहे।
सुनवाई के बाद आयोग ने पुलिस को मामले में नामजद राजा वड़िंग समेत सभी आरोपियों को पांच दिनों के भीतर गिरफ्तार करने और कार्रवाई से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट आयोग के सामने पेश करने के निर्देश दिए हैं।
नवंबर 2025 की चुनावी सभा से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला नवंबर 2025 में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। आरोप है कि सभा में राजा वड़िंग ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह के रंग और उनके पुराने पेशे को लेकर टिप्पणी की थी।
वायरल वीडियो में कथित तौर पर वड़िंग को पंजाबी भाषा में बूटा सिंह के रंग और उनके पुराने काम का जिक्र करते हुए सुना गया था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस द्वारा बूटा सिंह को देश का गृह मंत्री बनाए जाने की बात कही थी।
इस कथित टिप्पणी को लेकर बूटा सिंह के परिवार और अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े लोगों ने आपत्ति जताई थी। शिकायत के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मामले में सुनवाई शुरू की।
पुलिस को पांच दिन में कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने पुलिस को मामले में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। आयोग ने राजा वड़िंग समेत सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी कर पांच दिनों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
आयोग के इस निर्देश के बाद अब पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें हैं। पुलिस की ओर से मामले में आगे क्या कदम उठाया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं राजा वड़िंग
NCSC के निर्देश के बाद राजा वड़िंग के पास कानूनी विकल्प भी मौजूद हैं। वह आयोग के निर्देश को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत जरूरत पड़ने पर मामला आगे सुप्रीम कोर्ट तक भी जा सकता है।
फिलहाल आयोग के आदेश के बाद यह मामला पंजाब की राजनीति में एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई और संभावित कानूनी कदमों से मामले की दिशा साफ होने की उम्मीद है।


