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सिरसा में दूध के रेट को लेकर पशुपालकों का आंदोलन खत्म, 10 रुपये बढ़ाकर दूध बेचने का फैसला

चंडीगढ़। सिरसा में तीन दिन तक चला दूध बंद आंदोलन फिलहाल समाप्त हो गया है, लेकिन पशुपालकों की दूध के दाम बढ़ाने की मांग अभी जारी है। आंदोलन खत्म होने के बाद पशुपालकों ने मौजूदा कीमत से 10 रुपये प्रति लीटर अधिक रेट पर दूध बेचने का फैसला दोहराया है। इसके साथ ही दूध की फैट के आधार पर बेहतर भुगतान की मांग को लेकर सरकार, प्रशासन और मिल्क प्लांटों पर दबाव बनाने की रणनीति भी जारी रहेगी।

किसान नेता जसवीर भाटी ने वीडियो जारी कर पशुपालकों और दूध कारोबार से जुड़े लोगों से आंदोलन के दौरान मिले सहयोग को आगे भी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि तीन दिन की हड़ताल के दौरान जिस तरह लोगों ने साथ दिया, उसी तरह आगे की मुहिम में भी सहयोग जरूरी है।

फैट के रेट बढ़ाने की मांग

जसवीर भाटी के मुताबिक, पशुपालकों की प्रमुख मांगों में नकली दूध पर रोक लगाना और दूध की गुणवत्ता यानी फैट के आधार पर बेहतर भुगतान शामिल है। उन्होंने गाय के दूध की फैट का रेट 16 रुपये और भैंस के दूध की फैट का रेट 13 रुपये करने की मांग रखी है। पशुपालकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में दूध उत्पादन की लागत बढ़ने के कारण बेहतर भुगतान जरूरी हो गया है।

10 रुपये बढ़ाकर दूध बेचने का फैसला

आंदोलन के दौरान पंचायत में लिए गए निर्णय के अनुसार पशुपालकों से मौजूदा कीमत के मुकाबले 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर दूध बेचने की अपील की गई है। जिन क्षेत्रों में हड़ताल के चलते दूध की सप्लाई बंद की गई थी, वहां अब दोबारा आपूर्ति शुरू करने की बात कही गई है। दूध कारोबारियों से भी बढ़े हुए रेट पर बिना किसी विवाद के दूध खरीदने और बेचने की अपील की गई है। आंदोलन से जुड़े लोगों ने स्पष्ट किया है कि कीमत को लेकर किसी तरह का झगड़ा या टकराव नहीं होना चाहिए।

पांच साल में बढ़ी लागत, रेट बढ़ाने की मांग

पशुपालकों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में पशुपालन की लागत में काफी इजाफा हुआ है। चारे, पशुओं की देखभाल और अन्य खर्च बढ़ने के बावजूद दूध के मौजूदा रेट को लेकर उनमें असंतोष है। उनका दावा है कि दूध की कीमत बढ़ने से दूध उत्पादकों के साथ-साथ डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों को भी राहत मिल सकती है।

17 अक्टूबर की बैठक पर टिकी नजर

अब इस मामले में अगला अहम पड़ाव 17 अक्टूबर को होने वाली बैठक होगी। सिरसा की जाट धर्मशाला में आयोजित होने वाली इस बैठक में पशुपालकों, दूध उत्पादकों और डेयरी संचालकों को बुलाया गया है। बैठक में सभी पक्ष दूध के रेट और फैट के भुगतान से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे। इसके बाद आगे की रणनीति और दूध की कीमत को लेकर फैसला लिए जाने की संभावना है। फिलहाल तीन दिन का दूध बंद आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन दूध के दाम बढ़ाने का मुद्दा अभी बना हुआ है। अब सभी की नजरें 17 अक्टूबर की बैठक पर हैं, जहां आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

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