‘अगर आंदोलन सफल नहीं हुआ तो भूत बनकर लौटूंगा’, भूख हड़ताल के 20वें दिन संसद कूच पर अड़े सोनम वांगचुक

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VIRAL NEWS : लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आंदोलन शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह आंदोलन सफल नहीं हुआ तो वह “भूत बनकर भी वापस आएंगे” और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। भूख हड़ताल के दौरान जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल हों। उन्होंने कहा कि आंदोलन को मजबूत बनाना ही उनकी सबसे बड़ी मदद होगी। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि उनसे अनशन समाप्त करने की अपील करने के बजाय आंदोलन को आगे बढ़ाने में सहयोग करें। वांगचुक ने कहा कि उनकी यह लड़ाई केवल लद्दाख के लिए नहीं, बल्कि देश के पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। उन्होंने दावा किया कि यदि उनकी आवाज़ नहीं सुनी गई तो इसका असर केवल लद्दाख ही नहीं बल्कि पूरे देश पर पड़ेगा।

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “अगर यह आंदोलन असफल रहा तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा। मेरी आत्मा तब तक चैन से नहीं बैठेगी, जब तक इस लड़ाई को मंजिल नहीं मिल जाती।”

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर आंदोलन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों के अनुसार लगातार उपवास के कारण उनका वजन काफी कम हो चुका है और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। इसके बावजूद उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। हाल के दिनों में कई सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और विभिन्न क्षेत्रों की सार्वजनिक हस्तियों ने भी वांगचुक के आंदोलन का समर्थन किया है। बॉलीवुड गायक विशाल ददलानी और अभिनेता अतुल कुलकर्णी सहित कई लोगों ने सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द सकारात्मक पहल करेगी। अब सभी की निगाहें 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे आंदोलन को और गति मिल सकती है।

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