Punjab Desk: देशभर में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों और छात्रों पर हो रही पुलिस कार्रवाई के विरोध में पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति (जुबानी वोट) से एक निंदा प्रस्ताव पारित किया है। विधानसभा में प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार अपने अधिकारों की मांग कर रहे युवाओं और ‘जेन-ज़ी’ (Gen-Z) के साथ मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री मान ने घोषणा की कि यह निंदा प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा, जिसमें देशभर में सख्त पेपर लीक रोधी कानून बनाने और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की जाएगी।
केंद्र सरकार पर बरसे CM मान: “93 पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भविष्य बर्बाद”
सदन और मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:
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पेपर लीक के कारण 22 छात्रों की खुदकुशी: 2014 के बाद से देश में 93 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं, जिनमें से 65 मामले 2019 से 2024 के बीच हुए। NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ी और निराशा के कारण 22 अभ्यर्थियों को अपनी जीवनलीला समाप्त करनी पड़ी।
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भाजपा शासित राज्यों में सबसे ज्यादा मामले: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं।
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छात्रों पर अत्याचार निंदनीय: हक मांग रहे छात्रों पर पैलेट गन और अश्रु गैस के गोले दागना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्र सरकार को पीड़ित छात्रों पर दर्ज केस तुरंत वापस लेने चाहिए और मृतक छात्रों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना चाहिए।
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CBI जांच और फास्ट-ट्रैक कोर्ट महज दिखावा: मान ने कहा कि हर बार जांच सीबीआई को सौंपी जाती है, लेकिन दोषियों को सजा नहीं मिलती। फास्ट-ट्रैक कोर्ट और परीक्षाओं में सेना/सुरक्षा बलों की मदद लेना व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है।
पंजाब का रिकॉर्ड: “साड़े चार साल में एक भी पेपर लीक नहीं”
अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
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शून्य पेपर लीक: पिछले साड़े चार वर्षों में आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकाल के दौरान पंजाब में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। नकल के कुछ मामलों पर तुरंत FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की गई।
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पारदर्शी भर्तियां: राज्य में बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के केवल मेरिट के आधार पर अब तक 68,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।
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शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब नंबर-1: नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पछाड़कर देश में पहला स्थान हासिल किया है।
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NEET में सरकारी स्कूल के बच्चों का डंका: वर्ष 2021 में जहां पंजाब के सरकारी स्कूलों के केवल 80 छात्रों ने NEET परीक्षा पास की थी, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 881 हो गई है।
कांग्रेस के वाकआउट पर उठाए सवाल
बहस के दौरान कांग्रेस द्वारा सदन से किए गए वाकआउट पर निराशा व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि जब देश के युवाओं के भविष्य का सवाल था, तब कांग्रेस ने राजनीति को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस के केंद्रीय नेता दिल्ली में प्रदर्शन करते हैं, वहीं पंजाब में युवाओं के हक की इस बहस का बहिष्कार कर देते हैं।


