रायपुर: नेपाल की धार्मिक यात्रा पर गए रायपुर के पांच दोस्तों के लिए यह सफर जिंदगी का सबसे खौफनाक अनुभव बन गया। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच फंसे सभी पांचों दोस्त अब सकुशल अपने घर लौट आए हैं। रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले अपनी मातृभूमि की मिट्टी को माथे से लगाया और बाबा पशुपतिनाथ का जयकारा लगाकर राहत की सांस ली।
परिवार को बिना बताए अचानक घर पहुंचे इन युवकों को देखकर उनके परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। सभी ने नेपाल में देखे भयावह मंजर और अपनी जिंदगी बचने की पूरी कहानी परिवार के साथ साझा की।
21 अगस्त को धार्मिक यात्रा पर निकले थे
माना कैंप इलाके के रहने वाले दिनेश सिंह ठाकुर, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, नारायण सेन और यतेंद्र प्रकाश 21 अगस्त को नेपाल की धार्मिक यात्रा के लिए रवाना हुए थे। यात्रा के दौरान उन्होंने मुक्तिनाथ और पोखरा के दर्शन किए।
दर्शन के बाद जब वे पोखरा से वापस लौट रहे थे, तभी धड़िंग जिले के मलेखू कस्बे के पास अचानक हालात बिगड़ गए। सुबह करीब 9:30 बजे पांचों दोस्तों ने चाय पीने के लिए अपनी गाड़ी सड़क किनारे रोक दी थी। महज 10 से 15 मिनट का यह छोटा सा ब्रेक उनके लिए जिंदगी बचाने वाला साबित हुआ।
चाय के 10 मिनट ने बदल दिया पूरा सफर
दोस्तों के मुताबिक, चाय पीने के बाद जैसे ही वे आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे थे, तभी भोटे कोशी और त्रिशूली नदी की घाटियों में अचानक बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने लगा। देखते ही देखते स्थिति बेहद भयावह हो गई।
जिस मुख्य पुल से उन्हें आगे जाना था, वह पानी के तेज बहाव में बह चुका था। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों की तलाश में भागने लगे।
दोस्तों ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने त्रिशूली नदी के तेज बहाव में कई कारों और सामान को बहते देखा। मंजर इतना भयावह था कि कुछ देर के लिए उन्हें भी अपनी जिंदगी की चिंता सताने लगी।
कुछ मिनट पहले निकल जाते तो हो सकता था बड़ा हादसा
पांचों दोस्तों का मानना है कि अगर वे चाय पीने के लिए कुछ मिनट के लिए नहीं रुकते और समय से आगे निकल जाते, तो शायद वे भी बाढ़ के उस खतरनाक बहाव की चपेट में आ सकते थे।
उनके लिए चाय का वह छोटा सा ब्रेक किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। पुल उनके पहुंचने से पहले ही बाढ़ में बह गया और उन्होंने सुरक्षित स्थान पर रुककर स्थिति सामान्य होने का इंतजार किया।
नेपाल में फंसे रहने के दौरान उन्होंने बेहद मुश्किल हालात का सामना किया। आखिरकार सुरक्षित निकलने के बाद जब वे रायपुर लौटे तो परिवार से मिलकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
अपनी इस यात्रा को याद करते हुए पांचों दोस्तों ने कहा कि नेपाल की धार्मिक यात्रा उनके लिए जिंदगी का ऐसा अनुभव बन गई, जिसे वे शायद कभी नहीं भूल पाएंगे। बाबा पशुपतिनाथ के दर्शन के साथ शुरू हुई यह यात्रा बाढ़ और तबाही के बीच जिंदगी की जंग में बदल गई, लेकिन आखिरकार सभी सुरक्षित अपने घर लौट आए।


