चंडीगढ़। हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि संविदा कर्मचारियों की व्यवस्था मौजूदा सरकार ने शुरू नहीं की है, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही है।
मुख्यमंत्री ने सदन में पुराने सरकारी आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि कांग्रेस शासन के नौ वर्षों के दौरान कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की संयुक्त श्रेणी में करीब 71 हजार कर्मचारियों की बढ़ोतरी हुई थी।
1967 से चली आ रही है संविदा व्यवस्था
विधानसभा में HKRNL से जुड़े ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 1967 के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 1967 को हरियाणा सरकार में कुल 97,385 कर्मचारी थे। इनमें 11,397 कर्मचारी कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट आधार पर काम कर रहे थे।
सैनी के अनुसार वर्ष 2013 तक नियमित कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 2,55,319 हो गई, जबकि उक्त संयुक्त श्रेणी में कर्मचारियों की संख्या 84,642 तक पहुंच गई। यानी 1967 के मुकाबले इस श्रेणी में 73,245 कर्मचारियों की वृद्धि हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 तक अनुबंध आधारित कर्मचारियों की संख्या एक लाख से अधिक हो चुकी थी। इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि संविदा रोजगार की व्यवस्था HKRNL के गठन के बाद शुरू हुई।
कांग्रेस के नौ साल के आंकड़ों पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने सदन में 2005 से 2014 के बीच के आंकड़े भी रखे। उनके मुताबिक 1967 से 2005 के बीच 38 वर्षों में कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की संख्या 11,397 से बढ़कर 38,949 हुई।
वहीं, 2005 से 2014 के बीच कांग्रेस शासन के नौ वर्षों में यह संख्या बढ़कर करीब 1.10 लाख तक पहुंच गई। सैनी ने दावा किया कि जहां 38 वर्षों में करीब 27,552 कर्मचारियों की वृद्धि हुई, वहीं कांग्रेस के नौ साल में यह बढ़ोतरी लगभग 71 हजार रही।
उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि अगर संविदा व्यवस्था इतनी बड़ी समस्या थी तो कांग्रेस के शासनकाल में इसमें इतनी तेजी से बढ़ोतरी क्यों हुई।
ठेकेदार आधारित व्यवस्था खत्म करने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि HKRNL बनाने का उद्देश्य केवल ठेकेदारों को हटाना नहीं, बल्कि रोजगार देने की पूरी प्रक्रिया में बदलाव करना था। उन्होंने दावा किया कि पुरानी व्यवस्था में कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन, पीएफ और अन्य सुविधाओं के लिए ठेकेदारों पर निर्भरता रहती थी।
सरकार के अनुसार, कर्मचारियों को निर्धारित वेतन से कम भुगतान करने और 12 महीने की जगह 11 महीने का वेतन देने जैसी शिकायतें भी सामने आती थीं।
HKRNL के जरिए युवाओं को ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा दी गई है। निर्धारित योग्यता और पात्रता के आधार पर कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। इसके लिए ‘Deployment of Contractual Persons Policy-2022’ लागू की गई है।
समान काम के लिए समान वेतन दरों पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग ठेकेदारों के जरिए भुगतान होने के कारण संविदा कर्मचारियों के वेतन में असमानता रहती थी। HKRNL के गठन के बाद 19 जनवरी 2022 से समान वेतन दरों की व्यवस्था लागू की गई।
उन्होंने बताया कि 9 अप्रैल 2026 से लागू श्रम दरों के अनुसार अकुशल कर्मचारियों के लिए 15,220.71 रुपये, अर्धकुशल कर्मचारियों के लिए 16,780.74 रुपये और कुशल कर्मचारियों के लिए 18,500.81 रुपये प्रतिमाह की दर निर्धारित की गई है।
ट्रांसफर और अनुकम्पा नियुक्ति की सुविधा
सैनी ने कहा कि HKRNL के माध्यम से संविदा कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण और डी.डी.ओ. शिफ्टिंग की व्यवस्था भी की गई है। उनके अनुसार अब तक ऐसे 1,316 मामलों को मंजूरी दी जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि सेवा के दौरान किसी संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर पात्र आश्रित को रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है। अब तक 306 पात्र लोगों को अनुकम्पा आधार पर रोजगार दिया जा चुका है।
परिवार को तीन लाख रुपये की अनुकम्पा सहायता या अनुकम्पा नियुक्ति में से किसी एक विकल्प को चुनने की सुविधा भी दी गई है।
EPF और ESI को लेकर सरकार ने बताए आंकड़े
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि HKRNL के माध्यम से कर्मचारियों के EPF, ESI और श्रम कल्याण निधि का भुगतान व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक इन मदों में बड़ी राशि जमा की गई है।
सैनी के अनुसार अब तक करीब 2,100 करोड़ रुपये EPF, ESI और श्रम कल्याण निधि के रूप में जमा किए जा चुके हैं। उन्होंने विपक्ष से पिछली सरकार के दौरान कर्मचारियों के EPF कटौती और उसके खातों में जमा होने का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक करने की मांग की।
कमीशन के नाम पर बचत का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था में कुल बिल का करीब दो प्रतिशत कमीशन के तौर पर दिया जाता था, जबकि HKRNL केवल 0.5 प्रतिशत निगम शुल्क लेता है।
उन्होंने दावा किया कि निगम की स्थापना के बाद संबंधित संस्थाओं से करीब 81.44 करोड़ रुपये निगम शुल्क के रूप में प्राप्त हुए हैं। अगर पुरानी व्यवस्था के अनुसार दो प्रतिशत कमीशन दिया जाता तो करीब 160 करोड़ रुपये खर्च होते। इस हिसाब से सरकार को लगभग 78.56 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
महिला कर्मचारियों को छुट्टी और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविदा महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश समेत विभिन्न प्रकार की छुट्टियों का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा चिकित्सा और आकस्मिक अवकाश की सुविधा भी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि 21 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले पात्र संविदा कर्मचारियों को ESIC के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं। वहीं, इससे अधिक वेतन वाले कर्मचारियों को चिरायु योजना के जरिए स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने का दावा किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि HKRNL के जरिए सरकार संविदा कर्मचारियों के रोजगार को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है।


