चंडीगढ़/लुधियाना: पंजाब और चंडीगढ़ के आम नागरिकों के लिए महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। ईंधन की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते महज 10 दिनों के भीतर यह चौथी बार है जब तेल महंगा हुआ है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल के दाम में करीब ₹2.60 प्रति लीटर और डीजल में लगभग ₹2.70 प्रति लीटर का इजाफा हुआ है, जिसने आम जनता के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है।
चंडीगढ़ में टूटा रिकॉर्ड, पहली बार पेट्रोल ₹100 के पार
इस मूल्य वृद्धि का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक असर केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में देखने को मिला है, जहाँ पहली बार पेट्रोल की कीमत ने ₹100 प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर लिया है। अब यहाँ पेट्रोल ₹101.53 प्रति लीटर और डीजल ₹89.63 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।
पंजाब में हाहाकार: मोहाली में पेट्रोल ₹106 के करीब
पंजाब के विभिन्न जिलों में पेट्रोल और डीजल के दाम अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच चुके हैं। राज्य में पेट्रोल का औसत रेट ₹105.44 और डीजल का औसत रेट ₹95.38 प्रति लीटर हो गया है। पूरे राज्य में मोहाली सबसे महंगा इलाका रहा, जहाँ पेट्रोल ₹105.99 प्रति लीटर बिक रहा है।
10 दिनों में ₹7.50 तक की बढ़ोतरी: इससे पहले तेल कंपनियों ने 15 मई, 19 मई और 23 मई को भी कीमतों में बढ़ोतरी की थी। लगातार लगे इन चार झटकों के कारण पिछले 10 दिनों में पेट्रोल करीब ₹7.25 और डीजल ₹7.55 प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
पंजाब के प्रमुख शहरों में ईंधन की नई दरें
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लुधियाना: यहाँ पेट्रोल ₹105.42 प्रति लीटर और डीजल ₹95.34 प्रति लीटर मिल रहा है। जबकि प्रीमियम (पावर) पेट्रोल की कीमत ₹114.80 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
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पठनकोट: यहाँ पेट्रोल का नया दाम ₹105.87 प्रति लीटर और डीजल का दाम ₹95.79 प्रति लीटर हो गया है।
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जालंधर: यहाँ जनता को पेट्रोल के लिए ₹104.87 प्रति लीटर और डीजल के लिए ₹94.84 प्रति लीटर चुकाने पड़ रहे हैं।
आम जनता, किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर चौतरफा मार
ईंधन की कीमतों में लगी इस आग का सीधा असर अब बाजार और रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखने लगेगा:
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बढ़ेगी माल ढुलाई और किराया: टैक्सी, ऑटो, बसों के किराए के साथ-साथ ट्रकों की माल ढुलाई (फ्रेट चार्ज) बढ़ने की पूरी संभावना है।
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रसोई का बजट होगा प्रभावित: ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने से फल, सब्जियां, राशन, दूध और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर माल ढुलाई बढ़ने से घरों का मासिक बजट 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
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किसानों की बढ़ी चिंता: डीजल महंगा होने से सीधे तौर पर खेती की लागत बढ़ जाएगी। ट्रैक्टर, कंबाइन और ट्यूबवेल चलाने के लिए अब किसानों को ज्यादा जेब ढीली करनी होगी, जिससे अनाज की उत्पादन लागत भी बढ़ेगी।
आखिर क्यों आ रहा है कीमतों में यह उछाल?
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कच्चे तेल (Crude Oil) में तेजी: वैश्विक तनाव और विशेष रूप से पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। जो कच्चा तेल पहले करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर था, वह अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है।
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कंपनियों पर दबाव: तेल कंपनियों का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते दामों के कारण वे लंबे समय से घाटे में चल रही थीं, जिसके चलते कीमतों में संशोधन करना बेहद जरूरी हो गया था।
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टैक्स का गणित: भारत में पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत कच्चे तेल की बेस प्राइस, रिफाइनिंग कॉस्ट, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट (VAT) को जोड़कर तय होती है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में टैक्स दरें भिन्न होने से कीमतें भी अलग होती हैं।
मार्च 2024 में लोकसभा चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर राहत दी थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण अब वह राहत पूरी तरह गायब हो चुकी है।