डेस्क: हरियाणा में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत दोषी अधिकारियों पर लगाए गए जुर्माने की वसूली को लेकर राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लोकायुक्त के समक्ष राज्य सूचना आयोग के अधिकारियों ने एक अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद सभी विभागों को लंबित (बकाया) जुर्माना राशि तय समय सीमा के भीतर वसूलने के कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सरकार की इस सख्ती का असर भी दिखने लगा है। इस साल 1 जनवरी से 16 फरवरी 2026 के बीच ही अधिकारियों से 12 लाख 48 हजार 800 रुपये की रिकवरी की जा चुकी है।
अधिकारियों पर बकाया है 2.95 करोड़ का जुर्माना
यह पूरा मामला जुलाई 2020 में पानीपत के आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर द्वारा लोकायुक्त में दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि सूचना न देने या देरी से देने वाले अधिकारियों पर जो जुर्माना लगाया जाता है, उसे वे जमा नहीं करवा रहे हैं और न ही सरकार को इसकी सही जानकारी दे रहे हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त ने नोटिस जारी कर सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।
लोकायुक्त की जांच और रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि विभिन्न सरकारी विभागों के लापरवाह अधिकारियों पर 2.95 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना बकाया है।
वेतन और पेंशन से होगी सीधी रिकवरी
जुर्माना दबाकर बैठे अधिकारियों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। लोकायुक्त को सौंपी गई रिपोर्ट में सरकार ने बताया:
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ऐतिहासिक फैसला: 24 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जो अधिकारी आरटीआई का जुर्माना नहीं भर रहे हैं, उनके वेतन (Salary) से यह राशि काटी जाएगी।
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सेवानिवृत्त अफसरों पर भी गाज: यदि दोषी अधिकारी रिटायर हो चुका है, तो उसकी पेंशन (Pension) से इस जुर्माने की रिकवरी शुरू की जाएगी।
सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि आरटीआई कानून को हल्के में लेने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है और उन्हें जेब से जुर्माना हर हाल में भरना ही होगा।
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