जालंधर: महानगर सहित देश भर में आज त्याग और समर्पण का प्रतीक त्योहार बकरीद (ईद-उल-अजहा) बेहद अकीदत और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही गुलाब देवी रोड स्थित मुख्य ईदगाह सहित विभिन्न मस्जिदों में मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए और पवित्र नमाज अदा की। नमाज के दौरान मुल्क की अमन-शांति, आपसी भाईचारे, सलामती और तरक्की के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं।
नमाज मुकम्मल होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। इस पाक मौके पर पूर्व सांसद सुशील कुमार रिंकू भी मुस्लिम भाईचारे को ईद की बधाई देने विशेष रूप से ईदगाह पहुंचे।
देश तभी बनेगा विश्व गुरु, जब मिलकर करेंगे काम
ईदगाह पहुंचे राजनीतिक और सामाजिक नेताओं के साथ मुस्लिम भाईचारे के प्रबुद्ध लोगों ने देश की एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारा मुल्क दिन दोगुनी और रात चौगुनी तरक्की करे, यही खुदा से दुआ है। उन्होंने संदेश दिया कि जब हम सभी मजहब के लोग आपस में भाईचारे को बढ़ाकर, एकजुट होकर देश के विकास में अपना योगदान देंगे, तभी हमारा भारत सचमुच ‘विश्व गुरु’ बन पाएगा।
नीट (NEET) परीक्षा लीक, महंगाई और बेरोजगारी पर तीखे तेवर
इस धार्मिक उत्सव के बीच समाज में पनप रहे ज्वलंत मुद्दों पर भी जमकर चर्चा हुई और राजनीतिक दलों पर तीखे निशाने साधे गए:
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युवाओं के भविष्य से खिलवाड़: लोगों ने नीट (NEET) एग्जाम के मुद्दे को उठाते हुए गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज कोई भी रोजगार पर बात नहीं करना चाहता। नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी के कारण देश के करीब 22 लाख बच्चों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, उस पर चुप्पी हैरान करने वाली है।
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महंगाई की मार: कार्यक्रम में बढ़ती महंगाई, विशेषकर रसोई गैस सिलेंडर के बेतहाशा बढ़े दामों और छोटे व्यापारियों व स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-फड़ी वालों) के खत्म होते रोजगार पर गहरी चिंता जताई गई।
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मुद्दों से भटकाने की राजनीति: वक्ताओं ने किसी भी राजनीतिक दल का सीधा नाम लिए बिना कहा कि आज बड़ी चतुराई से बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाकर उन्हें धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रशासन पर भी तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन नमाज को लेकर तो नियम कायदे गिना देता है, लेकिन यह गारंटी नहीं देता कि भविष्य में नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं लीक नहीं होंगी। देश में ऐसी शिक्षा नीति होनी चाहिए जो अमीर-गरीब का भेद मिटाए, ताकि एक गरीब का बच्चा भी पढ़-लिखकर IAS अधिकारी बन सके।
“नफरत को सिर्फ मोहब्बत से ही खत्म किया जा सकता है। हम सभी को मिलकर प्यार का पैगाम फैलाना होगा।”
क्या है बकरीद और कुर्बानी का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बकरीद को ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है। यह मीठी ईद (ईद-उल-फितर) के बाद मुस्लिम समाज का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, यह ज़ुल-हिज्जा महीने के 10वें दिन मनाई जाती है, जो मक्का की पवित्र हज यात्रा के समापन का भी प्रतीक है।
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तीन दिन चलेगी कुर्बानी: आज 28 मई को ईद की नमाज के साथ ही इस त्योहार की शुरुआत हो गई है। परंपरा के अनुसार, 28, 29 और 30 मई तीनों दिन योग्य जानवरों की कुर्बानी दी जा सकेगी।
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कुर्बानी का असली संदेश: बकरीद के दिन अपनी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी देने की रीत है। इस त्योहार का सच्चा आध्यात्मिक अर्थ पशुओं की कुर्बानी देने के साथ-साथ अपने भीतर के स्वार्थ, अहंकार, लालच और सामाजिक बुराइयों को त्याग कर एक नेक और सच्चा इंसान बनना है।