पंजाब डेस्क: पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन पर तीखा पलटवार किया है। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमन अरोड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार निकाय चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से कराना चाहती थी, लेकिन धूरी और संगरूर में रवनीत बिट्टू ने जिस तरह की बदतमीजी और मारपीट दिखाई, उसकी उम्मीद एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से नहीं थी।
अमन अरोड़ा ने कहा कि जब उन्होंने इस पर सैद्धांतिक सवाल उठाए, तो बिट्टू ने शालीनता की हदें पार करते हुए उनके और उनके स्वर्गीय पिता के खिलाफ घटिया बयानबाजी शुरू कर दी, जिसका जवाब देना बेहद जरूरी है।
भाई को बिना नियमों के डीएसपी बनाने पर घेरा
अमन अरोड़ा ने रवनीत बिट्टू को घेरते हुए सीधे सवाल किए:
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एक तरफ आप पंजाब पुलिस के जवानों को ‘दलाल’ और ‘गुंडा’ कहते हैं, तो दूसरी तरफ 2017 में कांग्रेस सरकार के दौरान सभी नियमों को ताक पर रखकर अपने भाई गुरइकबाल सिंह हनी को सीधे डीएसपी (DSP) क्यों लगवाया था?
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उन्होंने कहा कि आज भी बिट्टू के भाई पंजाब के लोगों के टैक्स के पैसे से सैलरी ले रहे हैं।
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अरोड़ा ने आगे कहा, “मैं पूर्व मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह जी का सम्मान करता हूँ, लेकिन अगर आप अपने भाई के लिए कानून बदल सकते थे, तो उस बम धमाके में शहीद हुए बाकी 17 पुलिसकर्मियों और आम लोगों के परिवारों को डीएसपी क्यों नहीं बनवाया? क्या उनकी शहादत कुछ नहीं थी?”
‘दलबदलू’ और ‘कपूत’ वाले बयान पर करारा जवाब
रवनीत बिट्टू द्वारा उन्हें ‘दलबदलू’ कहे जाने पर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वह 2016 में उसूलों के लिए कांग्रेस छोड़कर ‘आप’ में आए थे, जबकि बिट्टू ने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी हार देखकर केवल सत्ता के लालच में कांग्रेस छोड़ी और भाजपा में शामिल हो गए, जहाँ जनता ने उन्हें फिर नकार दिया।
बिट्टू द्वारा खुद को ‘कपूत’ कहे जाने पर अरोड़ा ने भावुक होकर कहा, “पुत्र सुपुत्र है या कपुत्र, यह जानने के लिए आपको या तो मेरे स्वर्गीय पिता के पास जाना होगा या फिर कल सुनाम आकर मेरी उस बीमार माँ से पूछना होगा, जो अस्पताल में ऑपरेशन के बाद पिछले डेढ़ महीने से बिस्तर पर हैं।”
पिता की आत्महत्या का भावुक सच और जीजा पर आरोप
अपने स्वर्गीय पिता श्री भगवान दास अरोड़ा की मौत का जिक्र करते हुए अमन अरोड़ा काफी भावुक और गुस्से में नजर आए। उन्होंने साफ किया कि उनके पिता ने डिप्रेशन की वजह से आत्महत्या की थी और उनके इस डिप्रेशन की वजह वही इंसान था, जिसके लिखे पेपर्स बिट्टू प्रेस कॉन्फ्रेंस में तोते की तरह रट रहे थे।
उन्होंने अपने जीजा राजिंदर दीपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
“राजिंदर दीपा ने हमारे पूरे परिवार को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने 2002 में घर का माहौल खराब किया, और 2007 व 2012 के चुनाव में मेरे खिलाफ खड़े हुए ताकि मैं विधायक न बन सकूँ। आज बिट्टू एक ऐसे इंसान का मुखौटा बन गए हैं जिसने हमेशा दूसरों के घर तोड़े हैं।”
ट्रांसपोर्ट में फर्जी सिग्नेचर के आरोपों पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि 15-20 साल पहले जब उनका ट्रांसपोर्ट चलता था, तो क्या बिट्टू वहां मैनेजर या कंडक्टर थे जो उन्हें इतनी जानकारी है? उन्होंने कोर्ट केस पर सफाई देते हुए कहा कि जब राजिंदर दीपा ने उनकी माँ पर हमला किया था, तब उन्होंने अपनी माँ को बचाया था, जिसके टांके आज भी उनके सिर पर हैं। अपनी माँ को बचाने के लिए उन्हें कोई भी सजा मंजूर है।
सरकारी बंगले के 2 करोड़ रुपये के बकाए पर तंज
चंडीगढ़ में किराए के मकान में रहने के आरोप पर पलटवार करते हुए अरोड़ा ने कहा, “मैं जहाँ भी रहा, अपने दम और शान से रहा। लेकिन मैं आपकी तरह सालों तक बिना किराया दिए सरकारी मकान में नहीं बैठा। जब आपको चुनाव लड़ने के लिए एनओसी (NOC) की जरूरत थी और सरकारी मकान का 2 करोड़ रुपये किराया बकाया था, तब आप कैसे रो रहे थे, यह सबने देखा है।”
कैरेक्टर सर्टिफिकेट और जमीन हड़पने की खुली चुनौती
अमन अरोड़ा ने कहा कि उन्हें अपने चरित्र के लिए बिट्टू या दीपा के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। सुनाम की जनता ने उन्हें 2022 के चुनाव में 75,277 वोटों की पंजाब के इतिहास की सबसे बड़ी रिकॉर्ड जीत दिलाकर उनके कैरेक्टर पर मुहर लगाई है।
हाउसिंग डिपार्टमेंट के दौरान लुधियाना में जमीन हड़पने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्री को खुली चुनौती दी:
“बिट्टू जी, समय आपका है, दिन आपका है और जगह भी आपकी है। लुधियाना तो क्या, अगर मेरे मंत्री रहते पूरे पंजाब में एक इंच जमीन भी हड़पी गई हो, तो आप वहाँ आकर उंगली रख दीजिए, मैं आज ही वह जमीन आपके नाम लिख दूँगा।”
अंत में उन्होंने कहा कि उनका पूरा परिवार आज एकजुट होकर उनके साथ खड़ा है। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि ऐसा बुरा समय (आत्महत्या का) बिट्टू या उनके किसी दुश्मन के घर में भी न आए। उन्होंने बिट्टू को दोबारा चुनौती दी कि यदि उन्हें कोई शक है, तो वे कल सुनाम आकर उनकी बीमार माँ से मिल लें या पंजाब के किसी भी कोने में आकर जमीन के मामले पर सीधे बात कर लें।
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