Mohali Court Verdict: पंजाब के मोहाली में स्थित विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने देश के खिलाफ युद्ध और आतंकी साजिश रचने के मामले में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (AGH) से जुड़े तीन कश्मीरी छात्रों को दोषी करार देते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास (कठिन कारावास) की सजा सुनाई है।
सजा पाने वाले दोषियों में कश्मीर के कुख्यात मारे गए आतंकी जाकिर मूसा का चचेरा भाई भी शामिल है। वहीं, सबूतों के अभाव में इस मामले के एक अन्य आरोपी सुहैल अहमद भट्ट को अदालत पहले ही बरी कर चुकी है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुआ सजा का एलान, लगीं UAPA की धाराएं
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए इन आतंकी मददगारों की पहचान जाहिद गुलजार, यासिर रफीक भट्ट और मोहम्मद इदरीस शाह के रूप में हुई है। ये तीनों मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। अदालत ने इन्हें बीती 1 जून को ही दोषी ठहरा दिया था और शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी के दौरान सजा का एलान किया। इन सभी को यूएपीए (UAPA), आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत सजा दी गई है।
कॉलेज हॉस्टल के कमरे में छुपा रखा था हथियारों का जखीरा
यह पूरा सनसनीखेज मामला साल 2018 का है, जब पंजाब पुलिस को खुफिया इनपुट मिला था कि जालंधर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ रहे कुछ छात्र देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं।
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छापेमारी की तारीख: 10 अक्टूबर 2018
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जगह: ‘सीटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी’ (जालंधर) के हॉस्टल का कमरा।
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क्या हुआ बरामद: पुलिस की औचक छापेमारी में कमरे से एक AK-47 राइफल, एक .30 बोर माउजर पिस्टल, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और करीब 1 किलोग्राम विस्फोटक पाउडर बरामद किया गया था। इसके तुरंत बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था।
NIA की जांच: स्लीपर सेल के रूप में इस्तेमाल हो रहे थे छात्र
मामले की गंभीरता और आतंकी कनेक्शन को देखते हुए इसकी जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) को सौंप दी गई थी। एनआईए की तफ्तीश में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आतंकी संगठन ‘अंसार गजवत-उुल-हिंद’ पंजाब में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों का ब्रेनवॉश कर उन्हें ‘स्लीपर सेल’ के रूप में इस्तेमाल कर रहा था।
एनआईए ने अदालत में मोबाइल फोरेंसिक डेटा, टेलीग्राम चैट्स और पुख्ता वैज्ञानिक सबूत पेश किए। इनसे यह साबित हुआ कि ये छात्र घाटी में बैठे अपने आतंकी आकाओं के साथ कोडवर्ड चैट के जरिए लगातार संपर्क में थे और देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने की फिराक में थे।
62 गवाह हुए पेश, कोर्ट ने ठुकराई बचाव पक्ष की दलील
इस पूरे ट्रायल के दौरान कोर्ट में कुल 62 गवाह पेश किए गए। सुनवाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब तीनों आरोपियों के पिता अपने पहले दिए बयानों से मुकर गए, जिसके बाद अदालत ने उन्हें ‘होस्टाइल’ (विद्रोही गवाह) घोषित कर दिया था। हालांकि, हॉस्टल के मुख्य वार्डन कुलवंत सिंह का बयान कोर्ट में बेहद अहम साबित हुआ।
बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में यह दलील देकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की कि ये छात्र ‘इस्लामोफोबिया’ के शिकार हैं और इन्हें फंसाया गया है। लेकिन माननीय अदालत ने वैज्ञानिक तथ्यों, डिजिटल सबूतों और बरामद हुए घातक हथियारों के मद्देनजर इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।