SPORTS DESK : भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा एक बार फिर कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर उतरने के लिए तैयार हैं। इस बार उनका लक्ष्य सिर्फ पदक जीतना नहीं, बल्कि पिछली अधूरी चुनौती को पूरा करते हुए ग्लासगो में स्वर्णिम इतिहास दोहराना है। नीरज पिछले कुछ वर्षों से लगातार विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और डायमंड लीग जैसे बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन के बाद अब उनकी निगाहें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर टिकी हैं। भारतीय खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि वह एक बार फिर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतेंगे।
हाल के महीनों में नीरज ने अपनी फिटनेस और तकनीक पर विशेष ध्यान दिया है। चोट से उबरने के बाद उन्होंने प्रतियोगिताओं में दमदार वापसी की और लगातार अच्छे थ्रो किए। यही वजह है कि उन्हें इस बार भी गोल्ड मेडल का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। नीरज के सामने दुनिया के कई शीर्ष जैवलिन थ्रोअर चुनौती पेश करेंगे। हालांकि, बड़े टूर्नामेंटों में दबाव झेलने का उनका अनुभव उन्हें बाकी खिलाड़ियों पर बढ़त दिला सकता है। भारतीय दल को भी उनसे बड़ी उम्मीदें हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि नीरज चोपड़ा का आत्मविश्वास और निरंतर प्रदर्शन उन्हें फिर से पोडियम के शीर्ष पर पहुंचा सकता है। यदि वह अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं, तो भारत के पदक तालिका में एक और स्वर्ण जुड़ सकता है। अब पूरे देश की निगाहें ग्लासगो में होने वाली जैवलिन स्पर्धा पर हैं, जहां नीरज चोपड़ा अपने अधूरे मिशन को पूरा करने और भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने के इरादे से मैदान में उतरेंगे।


