मुंबई: लोकप्रिय वेब सीरीज मिर्जापुर के तीन सफल सीजन के बाद अब इसकी कहानी बड़े पर्दे पर पहुंच चुकी है। मिर्जापुर द मूवी को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्साह देखने को मिल रहा है और फिल्म को भी फैंस का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म में सीरीज के कई लोकप्रिय किरदारों को बरकरार रखा गया है।
इन्हीं किरदारों में से एक है बीना त्रिपाठी, जिसका रोल अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने निभाया है। सीरीज में उनके किरदार को दर्शकों की खूब सराहना मिली थी। खासकर तीसरे सीजन में बीना का किरदार पहले से ज्यादा मजबूत और प्रभावशाली नजर आया।
इंटिमेट सीन्स की शूटिंग पर क्या बोलीं रसिका दुग्गल?
रसिका दुग्गल ने फिल्मों और वेब सीरीज में इंटिमेट सीन्स की शूटिंग के बदलते तरीकों पर बात की है। उन्होंने बताया कि अब ऐसे दृश्यों को फिल्माने के लिए इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर्स की मदद ली जाती है, जो एक्टर्स और पूरी टीम के बीच बेहतर तालमेल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अभिनेत्री के मुताबिक, इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर का होना इसलिए जरूरी है ताकि शूटिंग के दौरान कोई भी कलाकार असहज महसूस न करे। उन्होंने इसकी तुलना डांस सीक्वेंस से करते हुए बताया कि जिस तरह डांस के लिए कोरियोग्राफर होता है, उसी तरह इंटिमेट सीन के लिए भी एक विशेषज्ञ की जरूरत होती है।
रसिका ने बताया कि ऐसे दृश्यों की शूटिंग से पहले अक्सर वर्कशॉप आयोजित की जाती है। इसमें कलाकारों को बताया जाता है कि सीन में क्या होने वाला है, कौन-सी चीजें उनके लिए सहज हैं और किन चीजों को लेकर उन्हें असुविधा हो सकती है। साथ ही डायरेक्टर की जरूरतों और कलाकार के कंफर्ट के बीच संतुलन बनाने पर भी ध्यान दिया जाता है।
असहज महसूस होने पर बदला जाता है शूटिंग का तरीका
रसिका ने कहा कि अगर कोई कलाकार किसी खास चीज को लेकर असहज महसूस करता है, तो उसके अनुसार सीन को शूट करने का दूसरा तरीका तलाशा जाता है। उनका मानना है कि कलाकार की सहमति और सहजता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि पहले के दौर में इंटिमेट सीन्स अपेक्षाकृत कम होते थे और उस समय इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर जैसी व्यवस्था आम नहीं थी। आज फिल्मों और ओटीटी प्रोजेक्ट्स में ऐसे सीन्स ज्यादा खुले तौर पर फिल्माए जाते हैं, इसलिए कलाकारों के कंफर्ट और सुरक्षा पर ध्यान देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
क्लोज सेट से मिलती है ज्यादा सहजता
रसिका दुग्गल के मुताबिक, अब इंटिमेट सीन्स की शूटिंग पहले की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित तरीके से की जाती है। अगर कोई कलाकार असहज महसूस करता है, तो क्लोज सेट का विकल्प भी रखा जा सकता है। ऐसे सेट पर सिर्फ वही लोग मौजूद रहते हैं, जिनकी सीन के लिए वास्तव में जरूरत होती है।
रसिका का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से कलाकारों को अधिक सहज माहौल मिलता है और उन्हें पहले से पता होता है कि सीन में क्या और किस तरह शूट किया जाना है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्री में इस दिशा में आया बदलाव सकारात्मक है और इससे कलाकारों के सम्मान, सुरक्षा और कंफर्ट को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकता है।


