SPORTS DESK : भारत की खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचने के साथ अपनी संघर्षपूर्ण जिंदगी का ऐसा सच साझा किया है, जिसने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि खेल के सफर में उन्हें केवल आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का ही नहीं, बल्कि घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा। शर्मिला ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उनके जीवन का एक दौर बेहद दर्दनाक था। उन्होंने बताया कि एक रात उन्हें लगातार कई घंटों तक शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपना पूरा ध्यान खेल पर बनाए रखा। लगातार मेहनत, अनुशासन और अपने कोचों के मार्गदर्शन की बदौलत उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और फिर भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने का सपना साकार किया। शर्मिला का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत उसका आत्मविश्वास और कभी हार न मानने का जज़्बा होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली मुश्किलें इंसान को तोड़ने के बजाय मजबूत भी बना सकती हैं, यदि वह उनका डटकर सामना करे।
कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि शर्मिला की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है। शर्मिला धनखड़ की यह प्रेरणादायक यात्रा उन हजारों युवाओं के लिए संदेश है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं। उनकी उपलब्धि भारतीय खेल जगत में लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।


