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जनादेश के बिना ही सत्ता हथियाने के लिए समानांतर गैर-लोकतांत्रिक प्रणाली चला रही है BJP: हरपाल सिंह चीमा

Punjab Desk: भाजपा पर तीखा हमला करते हुए ‘आप’ के वरिष्ठ नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संघीय ढांचे को कमजोर करने की योजना बनाने वाली सरकार बताया।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का समर्थन करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “देश की बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्यों और पिछले दशक के दौरान भाजपा द्वारा की जा रही गैर-संवैधानिक गतिविधियों के बीच बहुत बड़ा अंतर है। पंजाब से छह राज्यसभा सदस्यों को तोड़ा गया है। यह स्पष्ट रूप से एक सुनियोजित और लोकतांत्रिक विकृति है कि 117 विधानसभा सीटों में से केवल दो सीटें जीतने वाली पार्टी अब छह राज्यसभा सीटों का दावा कर रही है।”

एजेंसियों के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर और मैनेजिंग डायरेक्टर के घर उन्हें डराने-धमकाने के लिए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल किया, ताकि उच्च सदन में बहुमत साबित किया जा सके और 123 सदस्यों के आंकड़े के करीब पहुंचा जा सके। देशभर में ऐसा ही कुछ चल रहा है—हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में क्रॉस वोटिंग, महाराष्ट्र में शिवसेना का टूटना, बिहार में नीतीश कुमार से जुड़े जनादेश में फेरबदल और गुजरात में विधायकों की खरीद-फरोख्त के जरिए चुने हुए प्रतिनिधियों को कमजोर किया जा रहा है।”

सीनियर ‘आप’ नेता ने आगे कहा, “ये कार्रवाइयां दर्शाती हैं कि भाजपा जनादेश जीतने में असफल रहने पर अप्रत्यक्ष रूप से राज्यों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक समानांतर गैर-लोकतांत्रिक प्रणाली चला रही है। अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित आम आदमी पार्टी का नेतृत्व बाबा साहिब डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में अटूट विश्वास रखता है, जबकि भाजपा का इसमें कोई विश्वास नहीं है और शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, लाला लाजपत राय और शहीद ऊधम सिंह के अद्वितीय बलिदानों को भुलाकर लोगों को बांटने और सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।”

अंत में उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को तानाशाही और कानूनहीन केंद्रीय सरकार से बचाने के लिए दूसरे राष्ट्रीय आंदोलन का समय आ गया है। ऐसी कार्रवाइयां ‘गुंडा राज’ का उदाहरण हैं और भारत के संघीय ढांचे के लिए गंभीर खतरा हैं, जिनका डटकर विरोध किया जाना चाहिए।

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