HomeHaryanaदुष्यंत चौटाला केस: हाईकोर्ट ने केंद्र, हरियाणा और CBI को घेरा

दुष्यंत चौटाला केस: हाईकोर्ट ने केंद्र, हरियाणा और CBI को घेरा

चंडीगढ़: जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके काफिले को रोकने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने वीरवार को हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले में जवाब-तलब किया है।

हाईकोर्ट ने उठाए जांच पर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पक्षों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने विशेष रूप से दो सवाल पूछे हैं:

  1. अब तक की जांच की वास्तविक स्थिति क्या है?

  2. याचिकाकर्ता (दुष्यंत चौटाला) को अब तक जांच प्रक्रिया में शामिल क्यों नहीं किया गया?

दुष्यंत चौटाला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद घई ने दलील दी कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन अब तक गठित एस.आई.टी. (SIT) ने उन्हें पूछताछ के लिए कोई नोटिस तक जारी नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस प्रक्रिया के मामले को लटकाए रखना पारदर्शिता और कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।

क्या है पूरा विवाद? (17 अप्रैल की घटना)

याचिका के अनुसार, घटना 17 अप्रैल 2026 को हिसार में हुई थी। दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया है कि:

  • एक सफेद बोलेरो वाहन ने उनके काफिले का रास्ता रोका।

  • सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिस अधिकारियों (जिनमें इंस्पेक्टर पवन कुमार का नाम शामिल बताया गया है) ने हथियार लहराते हुए उन्हें और उनके सुरक्षाकर्मियों को जान से मारने की धमकी दी।

  • दुष्यंत चौटाला Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता हैं, इसके बावजूद उनके साथ इस तरह की अभद्रता और सुरक्षा में चूक हुई।

पुलिस पर लगाया झूठे मुकद्दमों का आरोप

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि इस घटना के बाद निष्पक्ष जांच करने के बजाय हरियाणा पुलिस ने उल्टा दुष्यंत के समर्थकों और परिजनों पर झूठे मुकद्दमे दर्ज कर दबाव बनाने की कोशिश की। उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSO) ने भी इस संबंध में अलग से शिकायतें दर्ज कराई थीं।

निष्कर्ष: हाईकोर्ट के दखल के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में तेजी आने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ CBI के जवाब के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस मामले की जांच किस दिशा में जा रही है।

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