चंडीगढ़ / जालंधर: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई संगठनात्मक टीम की घोषणा कर दी है। पार्टी ने इस बार पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए अनुभवी और जमीनी नेताओं पर बड़ा दांव खेला है। इसी कड़ी में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए वरिष्ठ नेता तजिंदर सिंह बिट्टू को पंजाब भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, तजिंदर बिट्टू को यह अहम जिम्मेदारी देकर भाजपा ने दोआबा और जालंधर बेल्ट में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने की स्पष्ट रणनीति बनाई है।
कांग्रेस की गुटबाजी का फायदा उठाने की कोशिश
पंजाब में कांग्रेस वर्तमान समय में अंदरूनी खींचतान और संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। भाजपा कांग्रेस की इसी कमजोरी का सीधा फायदा उठाना चाहती है।
तजिंदर बिट्टू दशकों तक कांग्रेस में रहे हैं और पार्टी के अंदरूनी दांव-पेंच और रणनीति से भली-भांति वाकिफ हैं। हालांकि कुछ समय के लिए वह पंजाब की सक्रिय राजनीति से दूर होकर दिल्ली में केंद्रीय भूमिका निभा रहे थे, लेकिन अब भाजपा ने उन्हें वापस पंजाब के चुनावी मैदान में उतार दिया है।
प्रियंका गांधी के करीबी रहे, हिमाचल चुनाव में निभाई थी मुख्य भूमिका
तजिंदर सिंह बिट्टू का कांग्रेस में एक लंबा और प्रभावकारी राजनीतिक सफर रहा है:
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प्रियंका गांधी के भरोसेमंद: कांग्रेस में रहते हुए उन्हें पार्टी आलाकमान, विशेषकर प्रियंका गांधी का काफी करीबी माना जाता था।
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रायबरेली में चुनावी प्रबंधन: ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव के रूप में उन्होंने रायबरेली जैसे हाई-प्रोफाइल संसदीय क्षेत्र का चुनावी प्रबंधन संभाला।
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हिमाचल जीत के रणनीतिकार: वर्ष 2021 में उन्हें हिमाचल प्रदेश कांग्रेस का सह-प्रभारी बनाया गया था। माना जाता है कि 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने में उनकी रणनीतिक सूझबूझ की अहम भूमिका रही।
जालंधर और दोआबा में मजबूत आधार
जालंधर के राजिंदर नगर निवासी तजिंदर बिट्टू का दोआबा क्षेत्र में मजबूत जनाधार है:
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संगठनात्मक अनुभव: वह जालंधर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े रहे हैं।
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चुनावी अनुभव: वर्ष 2007 में उन्होंने जालंधर सेंट्रल विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें करीब 29 हजार वोट मिले थे।
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प्रशासनिक अनुभव: पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में वह ‘पनसप’ (PUNSUP) के चेयरमैन भी रहे।
भाजपा की भावी रणनीति: असंतुष्टों को जोड़ने और सिख वोट बैंक पर नजर
जालंधर, कपूरथला और होशियारपुर में तजिंदर बिट्टू की छवि एक प्रभावशाली सिख नेता और बेबाक वक्ता के रूप में है। भाजपा उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में पेश कर रही है जो पार्टी के पारंपरिक शहरी वोट बैंक से आगे बढ़कर सिख समुदाय और कांग्रेस के पुराने व असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को भाजपा के साथ जोड़ सके।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बिट्टू को दोआबा क्षेत्र में संगठन विस्तार, कार्यकर्ता सम्मेलनों के आयोजन और अन्य दलों के असंतुष्ट नेताओं को पार्टी में शामिल कराने की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। भाजपा नेताओं का दावा है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े चेहरे पार्टी का दामन थाम सकते हैं।


