चंडीगढ़। रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) और 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबसे अधिक पदक दिलाने वाले हरियाणा राज्य की अनदेखी की जा रही है, जो प्रदेश और यहाँ के खिलाड़ियों के साथ सरासर अन्याय है।
हरियाणा का योगदान 50% से अधिक, फिर भी उपेक्षा
सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने आंकड़े रखते हुए कहा कि ओलंपिक, एशियाई खेल या राष्ट्रमंडल खेल—किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत द्वारा जीते जाने वाले कुल पदकों में से 50 प्रतिशत से अधिक पदक हरियाणा के एथलीट लाते हैं। इसके बावजूद, जब देश में बड़े खेल आयोजनों के आयोजन की बात आती है, तो हरियाणा को मेजबानी या सह-मेजबानी की दौड़ से पूरी तरह बाहर कर दिया जाता है।
“कम से कम सह-मेजबान का दर्जा तो मिले”
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि संसद में कांग्रेस लगातार यह मांग उठाती आ रही है कि 2030 राष्ट्रमंडल खेल और 2036 ओलंपिक आयोजनों में हरियाणा को भी शामिल किया जाए। यदि राज्य को पूर्ण मेजबानी नहीं दी जा सकती, तो कम से कम इसे ‘सह-मेजबान’ (Co-host) का दर्जा मिलना चाहिए, ताकि यहाँ के खेल ढांचे और स्टेडियमों का विकास हो सके।
केवल अहमदाबाद पर ध्यान केंद्रित करने का आरोप
कांग्रेस सांसद ने खेल मंत्रालय के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इन दोनों वैश्विक स्पर्धाओं की बिड और तैयारियां केवल अहमदाबाद (गुजरात) को केंद्र में रखकर की जा रही हैं।
उन्होंने इसे राजनीतिक भेदभाव करार देते हुए कहा कि हरियाणा की खेल संस्कृति और खिलाड़ियों के ऐतिहासिक योगदान की लगातार अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी इस हक की लड़ाई को हर स्तर पर लड़ेगी ताकि हरियाणा के खिलाड़ियों को उनका वाजिब सम्मान और अधिकार मिल सके।


