अमृतसर। डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सरकार की ओर से पैरोल दिए जाने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो देना सरकार के दोहरे और भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि एक ओर सरकार राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो देकर राहत दे रही है, जबकि दूसरी ओर लंबे समय से जेलों में बंद बंदी सिंहों को बीमार परिजनों से मिलने के लिए भी पैरोल नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि इस तरह का रवैया कानून और न्याय के समान रूप से लागू होने को लेकर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से अलग-अलग जेलों में बंद बंदी सिंहों का मामला भी सरकारों की कथित भेदभावपूर्ण नीति का उदाहरण बन गया है। धामी के अनुसार, कई बंदी सिंह अपनी कानूनी सजा पूरी कर चुके हैं, इसके बावजूद उनकी रिहाई का मामला लंबित है।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राजनीतिक हितों के चलते सरकारें गुरमीत राम रहीम के गंभीर अपराधों को नजरअंदाज करते हुए उसे बार-बार पैरोल और फरलो दे रही हैं, जबकि बंदी सिंहों के मामलों में अलग रवैया अपनाया जा रहा है।
उन्होंने सरकारों से समानता के आधार पर निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि इस तरह के कथित दोहरे मापदंड से सिख समुदाय में सरकारों के प्रति अविश्वास और अलगाव की भावना और गहरी हो सकती है।


