HomeDharamशनि देव और राजा विक्रमादित्य की कथा

शनि देव और राजा विक्रमादित्य की कथा

Dharam Desk: एक समय की बात है, स्वर्गलोक में सभी नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुद्ध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) के बीच इस बात पर बहस छिड़ गई कि उनमें सबसे श्रेष्ठ और शक्तिशाली कौन है। जब कोई निर्णय नहीं हो सका, तो वे सभी देवराज इंद्र के पास पहुँचे। इंद्र ने विवाद से बचने के लिए उन्हें उज्जैन के न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य के पास भेज दिया।

2. विक्रमादित्य का न्याय

राजा विक्रमादित्य ने सभी ग्रहों के बैठने के लिए सोने, चांदी, पीतल, लोहे आदि के सिंहासन बनवाए। शनि देव का सिंहासन सबसे अंत में लोहे का था। जब सभी देवता अपने-अपने सिंहासनों पर बैठ गए, तो शनि देव को सबसे अंत में बैठने के कारण अपमान महसूस हुआ। उन्होंने क्रोध में आकर विक्रमादित्य से कहा, “राजा, तुमने मुझे सबसे नीचा स्थान दिया है। तुम मेरी शक्ति को नहीं जानते। सूर्य एक राशि पर एक महीना रहते हैं, लेकिन मैं साढ़े सात साल (साढ़ेसाती) तक रहता हूँ। अब तुम मेरी दृष्टि का फल भुगतोगे।”

3. राजा पर शनि का प्रकोप

शनि देव की साढ़ेसाती शुरू होते ही राजा विक्रमादित्य के जीवन में विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा।

  • एक सौदागर के भेष में शनि देव ने राजा को एक ऐसा घोड़ा बेचा, जिस पर बैठते ही वह उन्हें घने जंगल में ले गया।

  • भूख-प्यास से व्याकुल राजा एक दूसरे राज्य में पहुँचे, जहाँ उन पर चोरी का झूठा आरोप लगा।

  • सजा के तौर पर राजा के हाथ-पैर काट दिए गए और उन्हें शहर से बाहर फिंकवा दिया गया।

4. तेली के घर शरण और पश्चाताप

एक दयालु तेली ने राजा को अपने घर शरण दी और उन्हें कोल्हू चलाने के काम पर रख दिया। राजा विक्रमादित्य बिना किसी शिकायत के अपना कर्म करते रहे और शनि देव की आराधना में लीन रहे। एक रात जब राजा शनि देव की स्तुति गा रहे थे, तो उनके स्वर से पूरा वातावरण मंत्रमुग्ध हो गया।

5. शनि देव की प्रसन्नता

राजा का धैर्य और भक्ति देखकर शनि देव प्रकट हुए और बोले, “हे राजन! तुमने अपने अहंकार का दंड भुगत लिया है। क्या अब तुम मेरी शक्ति को स्वीकार करते हो?” राजा ने हाथ जोड़कर शनि देव से क्षमा मांगी और प्रार्थना की, “प्रभु, जो कष्ट आपने मुझे दिए, वे अब किसी और को मत देना।”

शनि देव राजा की निस्वार्थ भावना से प्रसन्न हुए और उनके हाथ-पैर वापस ठीक कर दिए। उन्हें पुनः उनका राज्य और वैभव प्राप्त हुआ।

शनि देव के कुछ विशेष मंत्र व उपाय

यदि आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं, तो ये उपाय लाभकारी माने जाते हैं:

  • महामंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥

  • सरल मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नमः॥

  • उपाय:

    • शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

    • काली उड़द, काला कपड़ा या लोहे की वस्तुओं का दान करें।

    • हनुमान चालीसा का पाठ करें (मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों को शनि देव परेशान नहीं करते)।

सीख: शनि देव केवल बुरे कर्मों का दंड देते हैं। जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है और असहायों की मदद करता है, शनि देव उसे रंक से राजा बना देते हैं।

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