अमृतसर: एनालॉग यानी सिंथेटिक पनीर, नकली दूध और खोए की बिक्री को लेकर अमृतसर में खाद्य सुरक्षा विभाग और डेयरी कारोबारियों के बीच मामला गरमाता जा रहा है। सरकार की ओर से एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी एडवाइजरी के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने शहर के अलग-अलग इलाकों में डेयरियों और खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों की जांच तेज कर दी है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) अमृतसर डॉ. मनदीप सिंह रटौल ने बताया कि विभाग की टीमें लगातार चेकिंग कर रही हैं। जांच के दौरान संदिग्ध पाए जाने वाले पनीर के सैंपल लिए जा रहे हैं और उन्हें जांच के लिए स्टेट लैबोरेटरी भेजा जा रहा है।
संदिग्ध पनीर मिलने पर लिए जा रहे सैंपल
डॉ. रटौल के मुताबिक, एनालॉग पनीर सामान्य डेयरी दूध से तैयार होने वाले पनीर से अलग होता है। इसमें डेयरी उत्पादों की जगह वेजिटेबल ऑयल, इमल्सीफायर, मिल्क सॉलिड्स और अलग-अलग प्रकार के फैट का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार की एडवाइजरी के बाद विभाग ने डेयरियों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी है।
उन्होंने कहा कि अब तक कई पनीर के सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई खाद्य पदार्थ असुरक्षित या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संदिग्ध खाद्य सामग्री को जब्त या सीज भी किया जा सकता है।
शिकायत मिलने पर होगी तुरंत जांच
डीएचओ ने बताया कि फूड सेफ्टी अधिकारियों की टीमें नियमित रूप से रूटीन चेकिंग और सैंपलिंग करती हैं। इसके अलावा किसी व्यक्ति या संगठन की ओर से शिकायत मिलने पर भी मौके पर जाकर जांच की जाती है और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त सैंपल लिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग को स्थानीय स्तर के अलावा चंडीगढ़ स्तर और खाद्य सुरक्षा से जुड़े ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भी शिकायतें प्राप्त होती हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित टीमों को जांच के लिए भेजा जाता है।
डॉ. रटौल ने कहा कि पहले लिए गए कुछ सैंपलों की जांच में असुरक्षित और सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ सामने आए हैं। ऐसे मामलों में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाती है। असुरक्षित खाद्य पदार्थों से जुड़े मामलों को अदालत में पेश किया जाता है और कानून के तहत जुर्माने व सजा का प्रावधान है।
डेयरी कारोबारियों ने दिया 10 दिन का अल्टीमेटम
दूसरी ओर, भारतीय किसान एकता सिद्धूपुर के अमृतसर जिला प्रधान करमजीत सिंह नंगली ने सिंथेटिक दूध, पनीर और खोए के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्वास्थ्य विभाग को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
नंगली ने आरोप लगाया कि त्योहारों के सीजन में बाजारों में कथित तौर पर सिंथेटिक पनीर और खोए की बिक्री बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि असली दूध और डेयरी उत्पाद तैयार करने वाले पशुपालकों को ऐसे उत्पादों की वजह से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि नकली और घटिया डेयरी उत्पाद तैयार करने तथा बेचने वालों के खिलाफ लगातार और सख्त कार्रवाई की जाए।
कार्रवाई नहीं हुई तो डीएचओ कार्यालय के बाहर पक्का मोर्चा
करमजीत सिंह नंगली ने चेतावनी दी कि यदि अगले 10 दिनों में कार्रवाई में तेजी नहीं लाई गई तो डेयरी फार्मर्स संगठन की ओर से डीएचओ कार्यालय के बाहर पक्का मोर्चा लगाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमृतसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं और होटलों व बाजारों में पनीर की खपत भी काफी अधिक है। ऐसे में कथित तौर पर घटिया या सिंथेटिक पनीर की बिक्री लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य अधिकारियों से टकराव नहीं, बल्कि असली दूध और डेयरी कारोबार करने वाले पशुपालकों के हितों की रक्षा करना और लोगों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाना है।
लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील
डॉ. मनदीप सिंह रटौल ने लोगों से अपील की कि खाद्य सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतें। यदि किसी दुकान, डेयरी या अन्य स्थान पर मिलावटी या संदिग्ध दूध, पनीर, खोया या अन्य खाद्य पदार्थ बेचे जाने की जानकारी मिलती है तो इसकी शिकायत विभाग को की जाए।
उन्होंने साफ-सफाई का ध्यान न रखने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों से खाने-पीने की चीजें लेने से बचने की सलाह दी। मिठाइयां खरीदते समय भी साफ-सुथरी और भरोसेमंद दुकान को प्राथमिकता देने तथा अत्यधिक या अस्वाभाविक रंग वाली मिठाइयों से सावधान रहने की अपील की गई।
फिलहाल खाद्य विभाग की ओर से लिए गए सैंपलों की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट में खाद्य पदार्थों के मानकों पर खरा न उतरने की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं डेयरी कारोबारी नकली और सिंथेटिक उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की मांग पर अड़े हुए हैं।


