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‘हम हिस्सा मांगने वाले नहीं…’, CM भगवंत मान ने लॉन्च की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी, कल महिलाओं को मिलेगा बड़ा तोहफा!

लुधियाना: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज लुधियाना में उद्योगपतियों के साथ एक अहम बैठक के बाद प्रदेश की नई ‘पंजाब इंडस्ट्रियल पॉलिसी’ लॉन्च कर दी है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पिछली व्यवस्थाओं पर करारा प्रहार करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सरकार उद्योगपतियों से ‘हिस्सा’ मांगने या ‘लाल थैली’ (रिश्वत) लेने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की बस एक ही मंशा है कि राज्य में व्यापार फले-फूले और यहां के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

लॉन्चिंग इवेंट के दौरान सीएम मान ने खुद को कॉमर्स का छात्र बताते हुए कहा कि वह व्यापार की बारीकियों को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने उद्योगपतियों की मेहनत की तारीफ करते हुए कहा कि उनके कारण ही कई घरों के चूल्हे जलते हैं, इसलिए किसान की तरह वे भी प्रदेश के ‘अन्नदाता’ ही हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि अगर पंजाब को सही मायनों में ‘रंगला पंजाब’ बनाना है, तो इसमें इंडस्ट्री का रंग चढ़ना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि आज उद्योगों को यह सौगात दी गई है और कल प्रदेश की महिलाओं को भी एक बड़ा तोहफा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस नई नीति को उद्योगों के लिए एक ‘रनवे’ करार दिया है। उन्होंने उद्योगपतियों को पूरा भरोसा दिलाते हुए कहा कि इंडस्ट्री को जितनी लंबी उड़ान भरनी है भरे, पंजाब सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़ी है। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भारत को विश्व गुरु बनने का सपना पूरा करना है, तो यह पंजाब की तरक्की और औद्योगिक विकास के बिना बिल्कुल भी संभव नहीं है।

इस खास अवसर पर प्रदेश के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने दावा किया कि ऐसी शानदार औद्योगिक नीति देश के किसी अन्य राज्य में नहीं है। उन्होंने बताया कि अरविंद केजरीवाल और सीएम भगवंत मान के विजनरी नेतृत्व में लाई गई इस पॉलिसी से मुख्यमंत्री का इंडस्ट्री के प्रति प्यार झलकता है, यही वजह है कि कैबिनेट ने इसे महज 10 मिनट में पास कर दिया था।

अरोड़ा ने बताया कि इस पॉलिसी को बेहद बारीकी से तैयार करने के लिए 24 विशेष कमेटियां बनाई गई थीं। इस पूरी प्रक्रिया में विभाग के अधिकारियों, पंजाब डेवलपमेंट कमीशन के साथ-साथ अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी बेहतरीन इस्तेमाल किया गया। सबसे खास बात यह रही कि उद्योगपतियों की तरफ से मिले सुझावों में से 77 फीसदी को सीधा मान लिया गया, जबकि 1 प्रतिशत सुझाव केंद्र सरकार से जुड़े थे और बाकी बचे 22 प्रतिशत सुझावों पर भी गंभीरता से चर्चा की गई है।

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