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हरियाणा पुलिस भर्ती: आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सामान्य श्रेणी से ज्यादा अंक लाने वालों को परीक्षा में बैठने की अनुमति

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें सामान्य वर्ग (General Category) के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद अगले चरण की परीक्षा से बाहर कर दिया गया था। जस्टिस जे.एस. पुरी की बेंच ने इन अभ्यर्थियों को सी.ई.टी.-2 (CET-2) परीक्षा में प्रोविजनल आधार पर शामिल होने की अनुमति दे दी है।

क्या है पूरा विवाद?

याचिकाकर्ताओं के वकील रजत मोर ने कोर्ट को बताया कि अभ्यर्थियों ने पुरुष कांस्टेबल (जी.डी.) और (जी.आर.पी.) पदों के लिए आवेदन किया था। भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण (CET-1) में इन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त कर लिए थे।

  • दलील: अभ्यर्थियों का कहना है कि सामान्य वर्ग का कट-ऑफ 52.1796687 रहा, जबकि उनके अंक इससे कहीं अधिक थे।

  • शिकायत: बावजूद इसके, उन्हें शारीरिक माप परीक्षण (PMT) और अगले चरण के लिए नहीं बुलाया गया। आयोग ने श्रेणीवार (Category-wise) अलग कट-ऑफ लागू कर उन्हें प्रक्रिया से बाहर कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

अभ्यर्थियों की ओर से तर्क दिया गया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से ज्यादा अंक लाता है, तो उसे ‘ओपन कैटेगरी’ का उम्मीदवार माना जाना चाहिए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के ‘राजस्थान हाईकोर्ट बनाम रजत यादव’ मामले के हालिया फैसले का संदर्भ दिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि चयन प्रक्रिया के चरणों में उम्मीदवारों पर पहले सामान्य श्रेणी के आधार पर विचार होना चाहिए।

सरकार और आयोग का पक्ष

दूसरी ओर, हरियाणा सरकार और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के वकीलों ने याचिका का विरोध किया। उनका तर्क था कि:

  • भर्ती नियमों के तहत प्रत्येक श्रेणी के मानक अलग हैं।

  • शॉर्टलिस्टिंग की प्रक्रिया श्रेणीवार ही की जानी चाहिए।

  • उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अन्य मामले का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट न होने की बात कही।

हाईकोर्ट का फैसला और अगली सुनवाई

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार और HSSC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:

  1. चूंकि उम्मीदवारों के अंक सामान्य वर्ग से अधिक हैं, इसलिए उन्हें सी.ई.टी.-2 परीक्षा में बैठने दिया जाए।

  2. यह राहत प्रोविजनल (अस्थायी) है और उम्मीदवारों का अंतिम अधिकार मामले के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

मामले की अगली सुनवाई अब 2 जुलाई 2026 को तय की गई है। इस फैसले ने उन सैकड़ों युवाओं के लिए उम्मीद जगा दी है जो मेरिट में आने के बावजूद तकनीकी नियमों के कारण बाहर हो रहे थे।

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