नई दिल्ली: बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अपनी कप्तानी से सभी का ध्यान खींच लिया। सेंट्रल जोन के खिलाफ ईस्ट जोन की कप्तानी संभाल रहे वैभव ने दबाव के क्षण में बेहद सटीक DRS फैसला लिया, जो पूरी तरह सही साबित हुआ।
ईशान किशन के चोटिल होने के बाद वैभव को मिली कप्तानी
ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन मैच के शुरुआती सत्र में ही चोटिल होकर मैदान से बाहर हो गए। उनके दाहिने हाथ की उंगली में चोट लगी, जिसके बाद टीम की कमान उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी को सौंप दी गई।
महज 15 साल की उम्र में सीनियर स्तर के इतने बड़े मुकाबले में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालना अपने आप में बड़ी बात है। हालांकि, वैभव ने किसी तरह के दबाव में आए बिना मैदान पर नेतृत्व का परिचय दिया और अहम मौकों पर समझदारी भरे फैसले लिए।
40वें ओवर में दिखी वैभव की कप्तानी की झलक
मुकाबले का सबसे दिलचस्प पल 40वें ओवर में देखने को मिला। तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने सेंट्रल जोन के सेट बल्लेबाज आर्यन जुयाल के खिलाफ कैच आउट की जोरदार अपील की, लेकिन मैदानी अंपायर ने इसे नॉट आउट करार दिया।
इसके बाद मुकेश कुमार ने कप्तान वैभव सूर्यवंशी से DRS लेने की अपील की। वैभव खुद भी इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे कि गेंद बल्ले से लगी है या नहीं। इसके बावजूद उन्होंने आखिरी समय में रिव्यू लेने का फैसला किया।
वैभव का यह फैसला बिल्कुल सही साबित हुआ और DRS में गेंद के बल्ले से संपर्क की पुष्टि हुई। इस तरह महज 15 साल की उम्र में वैभव ने न सिर्फ कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि दबाव के पल में अपनी क्रिकेटिंग समझ का भी शानदार प्रदर्शन किया।
ईस्ट जोन के लिए यह पल इसलिए भी खास रहा क्योंकि वैभव ने दिखा दिया कि उम्र भले ही कम हो, लेकिन बड़े मुकाबलों में सही फैसला लेने के लिए जरूरी आत्मविश्वास और क्रिकेटिंग समझ उनके खेल में मौजूद है।


