JE को झूठे केस में फंसाने की साजिश: अदालत के आदेश पर जलालाबाद के DSP गुरसेवक सिंह बराड़ भी नामजद

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Punjab Desk: पंजाब स्टेट पावरकॉम के एक जूनियर इंजीनियर (JE) को कथित तौर पर नशीले पदार्थों के झूठे मामले (NDPS) में फंसाने की साजिश में एक बड़ा मोड़ आया है। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद, अब अदालत के आदेश पर जलालाबाद के डीएसपी (DSP) गुरसेवक सिंह बराड़ को भी इस मामले में नामजद किया गया है। जहां एक ओर गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को फाजिल्का की सब-जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, वहीं पुलिस फरार डीएसपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

रास्ते में कार रोककर की थी तलाशी

यह पूरा मामला 3 जून 2026 का है, जब पावरकॉम के जेई अमित कुमार मंडी रोडांवाली स्थित अपने घर से अरनीवाला शेख सुभान ड्यूटी पर जा रहे थे। गंग नहर के पास जब वह कार में रखे वाटर कूलर में पानी भरने के लिए रुके, तभी एक स्विफ्ट कार में आए तीन लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उनकी गाड़ी की तलाशी शुरू कर दी। तलाशी के दौरान उन्होंने कंडक्टर सीट के नीचे से टेप से लिपटा हुआ एक पैकेट बरामद होने का दावा किया।

भीड़ जुटने पर पहुंचे डीएसपी

जेई अमित कुमार ने तुरंत ही उस पैकेट से अपना कोई भी संबंध होने से साफ इनकार कर दिया। इसी बीच मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। शिकायत के अनुसार, कुछ ही देर में डीएसपी गुरसेवक सिंह बराड़ भी पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए और अमित कुमार को पैकेट समेत सीआईए (CIA) स्टाफ फाजिल्का ले जाया गया। हालांकि, जांच में पैकेट के अंदर कोई भी नशीला पदार्थ नहीं मिला, जिसके बाद जेई को छोड़ दिया गया।

बदनामी और फंसाने की थी साजिश

पीड़ित जेई ने अपने स्तर पर और परिवार की मदद से जब इस मामले की पड़ताल की, तो एक हैरान करने वाली साजिश सामने आई। पता चला कि 2 जून की रात को ही सुखजिंदर सिंह उर्फ शम्मी, सागर और राजन कुमार उर्फ नन्नू नामक युवकों ने मिलकर उनकी कार में वह सफेद पाउडर का पैकेट छिपाया था। इनका मकसद जेई को झूठे एनडीपीएस केस में फंसाकर बदनाम करना था और इसके लिए पुलिस को भी गुमराह किया गया था।

अदालत में हुआ बड़ा खुलासा

अमित कुमार की शिकायत पर थाना अरनीवाला पुलिस ने शुरुआत में तीनों मुख्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 212, 61(2) और एनडीपीएस एक्ट की धारा 58 के तहत केस दर्ज किया था। लेकिन मामले में असली यू-टर्न तब आया जब गिरफ्तार आरोपी सुखजिंदर सिंह ने अदालत के सामने बयान देते हुए डीएसपी गुरसेवक सिंह बराड़ की भूमिका का खुलासा किया। इसके बाद कोर्ट के सख्त आदेश पर डीएसपी को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया गया है।

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