चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सिख समुदाय को कृपाण धारण करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। हालांकि, यदि कृपाण का उपयोग किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए किया जाता है, तो उसे धार्मिक स्वतंत्रता का संरक्षण नहीं दिया जा सकता और ऐसी स्थिति में आरोपी पर आर्म्स एक्ट के कड़े प्रावधान लागू होंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हरियाणा के कुरुक्षेत्र का है, जहां एक आपराधिक घटना के दौरान आरोपी पर कृपाण से हमला करने का आरोप लगा था। सुनवाई के दौरान निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने यह मानते हुए आरोपी के खिलाफ दर्ज आर्म्स एक्ट की धाराएं हटा दी थीं कि कृपाण सिख धर्म का एक धार्मिक प्रतीक है।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
निचली अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया और कहा:
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कानून की गलत व्याख्या: ट्रायल कोर्ट ने आर्म्स एक्ट और धार्मिक स्वतंत्रता के कानून को समझने में भूल की है।
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सामान्य बनाम आपराधिक स्थिति: सामान्य परिस्थितियों में सिख धर्मावलंबियों द्वारा कृपाण धारण करने पर आर्म्स एक्ट लागू नहीं होता, लेकिन जब इसका इस्तेमाल किसी अपराध या हमले में किया जाता है, तो यह कानून के दायरे में आता है।
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कोई छूट नहीं: केवल सिख होने या कृपाण के धार्मिक प्रतीक होने के आधार पर किसी को आपराधिक हमले में आर्म्स एक्ट से राहत नहीं दी जा सकती।


