सोनीपत (हरियाणा): हरियाणा के सोनीपत से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने बदलते पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वृद्धाश्रम में रह रहे 74 वर्षीय शिवचरण गुप्ता का बीमारी के बाद निधन हो गया, लेकिन नेपाल, उत्तर प्रदेश और मुंबई में रहने वाली उनकी तीनों बेटियों में से कोई भी अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंची। अंततः एक बेटी ने वीडियो कॉल के माध्यम से पिता को अंतिम विदाई दी।
बीमारी के दौरान भी नहीं पहुंचा परिवार
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से महाराष्ट्र के वसई निवासी शिवचरण गुप्ता कपड़ों का कारोबार करते थे। पत्नी के निधन के बाद वह करीब डेढ़ वर्ष पहले सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रहने लगे थे।
वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कुमार ने बताया कि लगभग 20 दिन पहले उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने स्वयं अपनी बेटियों को फोन कर इसकी जानकारी दी थी। बेटियों ने आने का भरोसा दिया, लेकिन कोई भी उनसे मिलने नहीं पहुंचा।
निधन के बाद भी नहीं आईं बेटियां
मंगलवार तड़के शिवचरण गुप्ता का निधन हो गया। आश्रम प्रबंधन ने तुरंत उनकी बेटियों को इसकी सूचना दी, लेकिन उन्होंने आने में असमर्थता जताई। इसके बाद अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी वृद्धाश्रम ने संभाली।
नेत्रदान की मिली अनुमति, देहदान नहीं
आश्रम संचालक के मुताबिक, शिवचरण गुप्ता की इच्छा देहदान करने की थी, लेकिन परिजनों ने इसकी अनुमति नहीं दी। हालांकि, उन्होंने नेत्रदान के लिए सहमति दे दी, जिसके बाद उनकी आंखें दान की गईं।
जब आश्रम की ओर से अस्थियां परिजनों को सौंपने की बात कही गई तो बेटियों ने उन्हें लेने आने से भी इनकार कर दिया और अनुरोध किया कि आश्रम ही उनका विसर्जन कर दे। अंतिम संस्कार के खर्च के लिए उन्होंने ऑनलाइन 5,100 रुपये भेज दिए।
परिजनों के अनुसार, शिवचरण गुप्ता की बड़ी बेटी नेपाल में शिक्षिका हैं। दूसरी बेटी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं, जबकि सबसे छोटी बेटी मुंबई में निवास करती हैं।
घटना ने छेड़ी सामाजिक चर्चा
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया। उनका कहना है कि आज यात्रा के पर्याप्त साधन उपलब्ध होने के बावजूद यदि बुजुर्ग अपने अंतिम समय में भी अपनों का साथ नहीं पा रहे हैं, तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सोशल मीडिया पर इस मामले की चर्चा के बाद कई लोगों ने बुजुर्गों के प्रति परिवार की जिम्मेदारी, बदलते पारिवारिक मूल्यों और वृद्धाश्रमों की बढ़ती आवश्यकता को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं।


