अमृतसर। रेप और मर्डर मामले में सजा काट रहे डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने पर जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें सिखों के मामलों में दोहरा रवैया अपना रही हैं।
मीरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान ठीकरीवाल गांव में मीडिया से बातचीत करते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि खालसा पंथ लंबे समय से जेलों में बंद उन सिखों की रिहाई के लिए संघर्ष कर रहा है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है। उन्होंने विशेष रूप से जत्थेदार भाई जगतार सिंह हवारा का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी बुजुर्ग मां से मिलने के लिए पैरोल की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उन्हें न तो रिहा किया गया और न ही पैरोल दी गई।
जत्थेदार गड़गज ने कहा कि एक तरफ गंभीर अपराधों में सजा काट रहे राम रहीम को बार-बार पैरोल दी जा रही है, जबकि दूसरी ओर लंबे समय से जेलों में बंद सिखों के मामलों में अलग रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सरकारों के दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि जब राम रहीम को गिरफ्तार किया गया था, उस दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की जान चली गई थी। इसके बावजूद उन्हें बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति दी जा रही है। वहीं, दशकों से जेलों में बंद सिखों को पैरोल तक नहीं मिल रही।
जत्थेदार गड़गज ने भाई जगतार सिंह हवारा और उनकी बीमार मां के अधिकारों का हवाला देते हुए सरकार से मानवीय आधार पर पैरोल देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक या अन्य आधारों पर भेदभाव करने के बजाय इंसानियत को प्राथमिकता देनी चाहिए और भाई हवारा को अपनी मां से मिलने का अवसर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाई हवारा को उनकी मां से मिलवाने की मांग केवल सिख समुदाय की ही नहीं, बल्कि मानवता में विश्वास रखने वाले लोगों और संगठनों की भी भावना है। सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए उचित निर्णय लेना चाहिए।


