अमृतसर: श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा शिरोमणि अकाली दल (बादल) के वरिष्ठ नेता और SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला को खालसा पंथ से निष्कासित किए जाने के बाद उनका पहला बयान सामने आया है। चावला ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को गलत और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने इसे एक गहरी साजिश करार देते हुए कहा कि आखिरकार सच्चाई सामने आएगी। इससे पहले चावला ने SGPC सदस्यता और शिरोमणि अकाली दल के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया था।
अकाल तख्त ने सुनाया बड़ा फैसला
रविवार को श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पांच सिंह साहिबानों की बैठक हुई। बैठक के बाद कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने फसील से संगत के सामने पंथक आदेश सुनाया।
इस फैसले में अमरजीत सिंह चावला और श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को खालसा पंथ से निष्कासित करने की घोषणा की गई। दोनों पर सिख संस्थाओं से जुड़े पदों और सेवाओं पर आजीवन रोक भी लगाई गई है।
चावला पर क्या है मामला?
यह कार्रवाई चावला के खिलाफ दर्ज एक FIR के बाद हुई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 21 अगस्त को आनंदपुर साहिब थाने में एक महिला की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। FIR में चावला पर दुष्कर्म, गलत तरीके से बंधक बनाने और धमकी देने से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। महिला ने ज्ञानी मलकीत सिंह और SGPC के एक ड्राइवर पर अश्लील संदेश भेजने के भी आरोप लगाए थे। मामले की जांच पुलिस कर रही है।
आरोपों को बताया झूठा और साजिश
अमरजीत सिंह चावला ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। 16 सितंबर को जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया था। उन्होंने इसे अपने खिलाफ रची गई साजिश करार दिया और कहा कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी।
अकाल तख्त ने संबंध खत्म करने का दिया आदेश
अकाल तख्त के फैसले के अनुसार, चावला और ज्ञानी मलकीत सिंह से धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संबंध समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों को सिख संस्थाओं में किसी भी पद या सेवा पर रहने से भी प्रतिबंधित किया गया है।
अकाल तख्त ने कहा कि चावला तब तक निष्कासित रहेंगे, जब तक वह खुद को निर्दोष साबित कर श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं होते।
अब जांच के नतीजे पर नजर
अकाल तख्त के फैसले के बाद अब इस मामले में पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। चावला अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर चुके हैं, जबकि उनके खिलाफ दर्ज FIR में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में मामले की जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।


