पंजाब डेस्क: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी के एक हालिया बयान ने कांग्रेस के भीतर नए राजनीतिक संकट को जन्म दे दिया है। चन्नी द्वारा पंजाब कांग्रेस में ‘दलितों की अनदेखी’ किए जाने के आरोपों पर पार्टी आलाकमान ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व चन्नी को स्पष्टीकरण के लिए दिल्ली तलब कर सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में आयोजित कांग्रेस के SC विंग की एक बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी ने अपनी ही पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। चन्नी ने शिकायत की थी कि पंजाब कांग्रेस के भीतर दलितों को वह प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने पदों का हवाला देते हुए कहा कि:
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प्रदेश अध्यक्ष (अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग),
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नेता प्रतिपक्ष (प्रताप सिंह बाजवा),
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और छात्र व महिला विंग के शीर्ष पदों पर ‘जट्ट सिख’ चेहरों का कब्जा है।
चन्नी का तर्क था कि पार्टी के महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर दलित समुदाय की उपेक्षा की जा रही है। इस दौरान बैठक में मौजूद अन्य दलित नेताओं ने चन्नी के समर्थन में नारेबाजी भी की थी।
आलाकमान की नाराजगी: “चन्नी यह सवाल कैसे उठा सकते हैं?”
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व चन्नी के इन आरोपों से हैरान और नाराज है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि:
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इतिहास: कांग्रेस ने ही चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का पहला दलित मुख्यमंत्री बनाकर इतिहास रचा था।
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संगठनात्मक कद: उन्हें पार्टी की सर्वोच्च इकाई, कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) का सदस्य भी बनाया गया है।
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राष्ट्रीय नेतृत्व: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे स्वयं दलित समुदाय से आते हैं, ऐसे में पार्टी पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाना आधारहीन है।
पंजाब कांग्रेस में बढ़ी अंतर्कलह
चन्नी के इस बयान ने पंजाब कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को हवा दे दी है। जहां एक ओर कुछ दलित नेता चन्नी के पक्ष में लामबंद हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता इसे संगठन को कमजोर करने वाला बयान मान रहे हैं। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान से आगामी चुनावों की रणनीतियों पर असर पड़ने की आशंका है।
