Haryana Desk: हरियाणा सरकार ने प्रदेश में बढ़ते बैंक घोटालों पर लगाम लगाने और सरकारी धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। वित्त विभाग ने सभी सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों को अपने बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ऑडिट के कड़े निर्देश दिए हैं।
वित्त विभाग का सख्त रुख: ‘रिमाइंडर-1’ जारी
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता की ओर से पूर्व में जारी निर्देशों का पालन न होने पर अब विभाग ने ‘रिमाइंडर-1’ जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य को ‘अत्यंत आवश्यक’ और ‘समयबद्ध’ श्रेणी में रखा गया है। दरअसल, 17 मार्च 2026 को पहली बार ये निर्देश दिए गए थे, लेकिन अधिकांश विभागों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और रिपोर्ट जमा नहीं की।
प्रमुख निर्देश और जांच के बिंदु
सरकार ने सभी संबंधित कार्यालयों को निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है:
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ब्याज दरों का मिलान: सभी विभाग अपने बैंक खातों और एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों की समीक्षा करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि बैंक ने तय दरों के अनुसार ही ब्याज जमा किया है।
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परिपक्वता राशि (Maturity Amount) की जांच: एफडी की मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि की गणना की जाए और बैंक द्वारा दी गई राशि से उसका मिलान किया जाए।
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बैंक से प्रमाणपत्र: प्रत्येक एफडी पर लागू ब्याज दर और जमा की गई वास्तविक राशि का लिखित पुष्टिकरण प्रमाणपत्र (Certificate) संबंधित बैंक से प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
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बकाया राशि की वसूली: यदि जांच में पाया जाता है कि बैंक ने कम ब्याज दिया है, तो विभाग को तुरंत बैंक से संपर्क कर अंतर राशि (Balance amount) अपने खाते में जमा करवानी होगी।
15 अप्रैल तक की समयसीमा
वित्त विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए 15 अप्रैल 2026 की डेडलाइन तय की है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्य कार्यालय को भेजें।
विशेष नोट: यह कदम सरकारी फंड के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और बैंकों की संभावित लापरवाही या धोखाधड़ी से बचने के लिए उठाया गया है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।