Punjab Desk: देश की सीमाओं पर दिन-रात तैनात रहने वाले सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। अब जवानों को अपने गृह जिले में पुलिस से जुड़े मामलों या शिकायतों के निपटारे के लिए छुट्टी लेकर घर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पुलिस जिला खन्ना ने तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए “सैनिक समाधान प्रयास” नाम से एक विशेष और सराहनीय अभियान की शुरुआत की है।
खन्ना के एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना के तहत अब जवान देश के किसी भी कोने में ड्यूटी पर तैनात रहते हुए सीधे ऑनलाइन माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी सुनवाई होगी।
क्या है योजना और कैसे मिलेगी मदद?
अक्सर देखा जाता है कि देश की सुरक्षा में व्यस्त होने या छुट्टी न मिल पाने के कारण जवान अपने पारिवारिक या स्थानीय पुलिस मामलों की पैरवी नहीं कर पाते। इससे उनके मामले लंबे समय तक लटके रहते हैं और वे मानसिक तनाव का सामना करते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए यह पूरा फ्रेमवर्क तैयार किया गया है:
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सोमवार से शुक्रवार (ई-मेल से शिकायत): जवान अपनी शिकायतें, आवेदन या दस्तावेज खन्ना पुलिस की आधिकारिक ई-मेल आईडी ssu.khanna@punjabpolice.gov.in पर भेज सकते हैं। ई-मेल मिलते ही पुलिस मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर देगी।
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शनिवार को लाइव सुनवाई (वीडियो कॉन्फ्रेंस): हर शनिवार सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक विशेष वीडियो कॉल सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें खुद एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया जवानों से लाइव जुड़कर उनकी समस्याएं सुनेंगी।
त्वरित समाधान के लिए बना ‘सैनिक समाधान डैशबोर्ड’
एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने बताया कि इस प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए ठोस प्रशासनिक व्यवस्था की गई है:
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सीधे निर्देश: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के तुरंत बाद संबंधित गजटेड अधिकारी या थाना प्रभारी (SHO) को लिखित आदेश जारी किए जाएंगे ताकि मामले पर तुरंत एक्शन हो।
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सैनिक समाधान डैशबोर्ड: सभी शिकायतों का पूरा रिकॉर्ड रखने और उनकी मौजूदा स्थिति ट्रैक करने के लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड बनाया गया है।
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कड़ी निगरानी: एसपी हेडक्वार्टर को इस पूरे अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा, एसएसपी खुद हर 15 दिन में इन मामलों की समीक्षा (Review) करेंगी ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो।
एसएसपी का संदेश: “यह पहल केवल तकनीक का इस्तेमाल नहीं है, बल्कि देश की सेवा में तैनात हमारे जवानों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की भावना है। हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घर से दूर बैठे जवान को न्याय के लिए भटकना न पड़े और वह निश्चिंत होकर देश की रक्षा कर सके।”
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